Israel Hezbollah War: ‘अभी बहुत काम बाकी है, हम पूरा करेंगे’, लेबनान में हिजबुल्लाह के बड़े आतंकी गढ़ पर इजरायल का भीषण हमला; प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दी खुली चेतावनी

मध्य पूर्व (Middle East) में लंबे समय से सुलग रहा बारूद एक बार फिर भीषण विस्फोटों की गूंज में तब्दील हो गया है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में सक्रिय चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह के खिलाफ एक बड़ा और आक्रामक सैन्य अभियान चलाते हुए उसके सबसे मजबूत सामरिक गढ़ों को ध्वस्त कर दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि उनकी सेना ने लेबनान के सामरिक रूप से बेहद अहम ब्यूफोर्ट रिज (Beaufort Ridge) और अली अल-ताहर रिज (Ali al-Taher Ridge) पर हिजबुल्लाह के विशाल आतंकी बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है। ये दोनों पहाड़ी इलाके दशकों से हिजबुल्लाह के लिए न केवल प्राकृतिक सुरक्षा ढाल बने हुए थे, बल्कि यहां से इजरायल के उत्तरी शहरों पर एंटी-टैंक मिसाइलें और रॉकेट दागना बेहद आसान था। इजरायली वायुसेना के लड़ाकू विमानों और सटीक गाइडेड मिसाइलों ने हिजबुल्लाह के भूमिगत बंकरों, हथियार डिपो, आधुनिक सर्विलांस पोस्ट और गुप्त सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। इस विध्वंसक कार्रवाई के बाद सीमा के दोनों ओर तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है और पूरे लेबनान में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
'अभी बहुत काम बाकी है, हम पूरा करेंगे': प्रधानमंत्री नेतन्याहू की खुली और सख्त चेतावनी
इस बड़े सैन्य हमले के तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और एक वीडियो संदेश के जरिए सीधे शब्दों में अपने दुश्मनों को अल्टीमेटम जारी किया। नेतन्याहू ने दो-टूक लहजे में कहा कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल को एक और निर्णायक और ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल की नीति पूरी तरह शीशे की तरह साफ है—लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) में मौजूद किसी भी आतंकी ढांचे को पनपने नहीं दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "यदि हमारे दुश्मनों ने अब तक मिले झटकों से सबक नहीं सीखा है और वे दोबारा हम पर हमला करने की हिमाकत करते हैं, तो उन्हें पहले से भी ज्यादा भयानक और विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे। हमारा मिशन अभी अधूरा है, अभी काफी काम बाकी है और हम ईश्वर की मदद से इस काम को हर हाल में पूरा करेंगे।" नेतन्याहू का यह बयान साफ संदेश देता है कि इजरायल किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुके बिना हिजबुल्लाह की सैन्य रीढ़ को पूरी तरह तोड़ने तक अपने जमीनी और हवाई हमलों को रोकने के मूड में नहीं है।
कूटनीतिक वार्ताओं के बीच बारूदी एक्शन: रोम शांति चर्चा और जमीनी हकीकत का विरोधाभास
इजरायल की यह आक्रामक कार्रवाई उस नाजुक समय पर सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिशें चल रही थीं। हाल ही में इटली की राजधानी रोम में इजरायल और लेबनान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत का सातवां दौर आयोजित किया गया था। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने पिछले दिनों अपनी कैबिनेट बैठक में जानकारी दी थी कि रोम में दोनों पक्षों के बीच सीमा विवाद के स्थायी समाधान, युद्धविराम, विस्थापित नागरिकों के पुनर्वास, बफर जोन की पहचान और दोनों पक्षों द्वारा बंदी बनाए गए कैदियों की अदला-बदली जैसे अहम मसलों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। अमेरिकी प्रशासन भी इस बातचीत को वाशिंगटन फ्रेमवर्क समझौते के तहत अमलीजामा पहनाने में जुटा था। हालांकि, हिजबुल्लाह शुरू से ही इस द्विपक्षीय बातचीत का कड़ा विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, इजरायल ने यह साफ कर दिया है कि कूटनीतिक टेबल पर बातचीत अपनी जगह है, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए वह किसी भी आतंकी गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। शांति वार्ता के समानांतर हुए इस ताजा हमले ने यह साबित कर दिया है कि मध्य पूर्व में कूटनीति की राह बारूद के ढेरों के बीच से होकर गुजर रही है।
दक्षिणी लेबनान में बफर जोन नीति और उत्तरी इजरायल के विस्थापितों की वापसी
इजरायली रक्षा प्रतिष्ठान के अनुसार, ब्यूफोर्ट और अली अल-ताहर की चोटियों पर हिजबुल्लाह की मौजूदगी इजरायल के उत्तरी गैलिली क्षेत्र के लिए निरंतर खतरा बनी हुई थी। पिछले कई महीनों से चल रहे सीमा पार संघर्ष के चलते उत्तरी इजरायल के दर्जनों सीमावर्ती शहरों से साठ हजार से अधिक नागरिकों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। इजरायली सरकार पर घरेलू स्तर पर भारी राजनीतिक दबाव है कि वह इन सीमावर्ती इलाकों को पूरी तरह सुरक्षित करे ताकि बेघर हुए नागरिक अपने घरों को लौट सकें। नेतन्याहू प्रशासन की नई रणनीति दक्षिणी लेबनान में एक ऐसा अभेद्य बफर या 'सिक्योरिटी जोन' तैयार करना है, जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 के अनुरूप हिजबुल्लाह की कोई भी सशस्त्र उपस्थिति न रहे। इजरायली सेना लेबनान सीमा से लगे पहाड़ों में बनी उन सभी आधुनिक सुरंग प्रणालियों और निगरानी पोस्टों को डायनामाइट से उड़ा रही है, जिनका इस्तेमाल आतंकी गुट अचानक घुसपैठ या मिसाइल हमलों के लिए करता रहा है। इजरायल का लक्ष्य हिजबुल्लाह को लितानी नदी के उत्तर की ओर धकेलना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल के बाजार और भारत की चिंताएं
मध्य पूर्व में भड़का यह ताजा संघर्ष केवल लेबनान और इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक वैश्विक और क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। जैसे ही नेतन्याहू के सख्त बयान और नए हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आईं, वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के व्यापारिक समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताएं गहरा गई हैं। भारत के दृष्टिकोण से भी यह भू-राजनीतिक तनाव बेहद संवेदनशील है। नई दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे भारतीय औद्योगिक हब की ऊर्जा आपूर्ति काफी हद तक पश्चिम एशिया से आने वाले कच्चे तेल और एलएनजी पर निर्भर करती है। यदि लेबनान के रास्ते यह युद्ध क्षेत्रीय स्तर पर और फैलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है, जिससे भारत में ईंधन की कीमतें, परिवहन लागत और मुद्रास्फीति (महंगाई) पर सीधा असर पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, लेबनान और आसपास के खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी भारतीय विदेश मंत्रालय के लिए हमेशा एक सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहती है।
आने वाले दिनों में क्या और भड़क सकता है संघर्ष? क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा सवाल
ब्यूफोर्ट रिज पर अपने मजबूत ठिकाने खोने के बाद हिजबुल्लाह की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर रक्षा विशेषज्ञ बेहद चिंतित हैं। ईरान समर्थित यह शिया मिलिशिया संगठन भारी संख्या में लंबी दूरी की प्रिसिजन गाइडेड मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स से लैस माना जाता है। यदि हिजबुल्लाह ने तेल अवीव, हाइफा या इजरायल के संवेदनशील बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर जवाबी रॉकेट हमले किए, तो यह संघर्ष एक पूर्ण और सीधे युद्ध में बदल सकता है। अमेरिकी सैन्य अधिकारी और राजनयिक इस समय बेरूत और यरुशलम के बीच बैकचैनल संपर्कों के जरिए स्थिति को बेकाबू होने से रोकने की मशक्कत कर रहे हैं। हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू के अड़िग तेवरों और हिजबुल्लाह की आक्रामकता को देखते हुए यह साफ नजर आ रहा है कि सीमा पर बारूदी धुआं फिलहाल थमता दिखाई नहीं दे रहा। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि वाशिंगटन और रोम की कूटनीति युद्धविराम ला पाती है या फिर मध्य पूर्व एक और लंबे और भयावह युद्ध के चक्रव्यूह में समा जाता है।