Mutual Fund Update: इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स में नया SIP करने के विकल्प लगभग खत्म, 65 में से बची सिर्फ 1 स्कीम, जानिए क्या है बड़ी वजह

नई दिल्ली/लखनऊ। यदि आप अपने पोर्टफोलियो को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने के लिए किसी इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड (International Mutual Fund) में एक नया सिप (SIP) या एकमुश्त (Lump sum) निवेश शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी और चौंकाने वाली खबर है। भारतीय म्यूचुअल फंड बाजार में अब विदेशी निवेश के विकल्प लगभग पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। नियामकीय सीमा (Regulatory Limit) के कारण देश की अधिकांश एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) ने अपने अंतरराष्ट्रीय फंडों में नए निवेशकों की एंट्री और नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन पर सख्त रोक लगा दी है। वैल्यू रिसर्च के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश में चल रही कुल 65 इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीमों में से अब केवल 1 स्कीम ही ऐसी बची है, जो नए निवेश स्वीकार कर रही है।
क्यों बंद हो रहे हैं इंटरनेशनल फंड? जानिए इसके पीछे का तकनीकी कारण
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय फंडों में नए निवेश पर लगी यह रोक इन स्कीमों के खराब प्रदर्शन या किसी बाजार मंदी के कारण नहीं है। इसके पीछे पूरी तरह से सेबी (SEBI) और आरबीआई (RBI) द्वारा तय की गई नियामकीय सीमा जिम्मेदार है। दरअसल, भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए विदेशी प्रतिभूतियों (Foreign Securities) में निवेश करने की एक अधिकतम कुल सीमा पहले से निर्धारित है। हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में आई तेजी के कारण कई बड़े फंड हाउस अपनी उपलब्ध विदेशी निवेश सीमा का 100% इस्तेमाल कर चुके हैं। सीमा समाप्त होने के कारण ही हाल ही में 11 और प्रमुख इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड स्कीमों ने नए एसआईपी पंजीकरण पूरी तरह बंद कर दिए हैं।
बाजार में केवल 'बड़ौदा बीएनपी परिबास' का यह अकेला फंड है खुला
मौजूदा समय में पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में सिर्फ Baroda BNP Paribas Aqua Fund of Fund (FoF) ही इकलौता ऐसा इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड बचा है, जहां नए निवेशक अपनी नई एसआईपी या लंपसम पूंजी लगा सकते हैं। हालांकि, वित्तीय जानकारों ने आगाह किया है कि यह स्थिति भी बहुत ज्यादा दिनों तक स्थायी नहीं रहने वाली है। जैसे ही इस फंड हाउस की भी विदेशी निवेश सीमा पूरी हो जाएगी, वैसे ही यह आखिरी स्कीम भी नए निवेशकों के लिए हमेशा के लिए बंद हो सकती है।
मौजूदा निवेशकों पर क्या होगा असर? क्या बंद हो जाएगी पुरानी SIP?
इस नए प्रतिबंध के बीच राहत की बात यह है कि जिन निवेशकों की एसआईपी इन अंतरराष्ट्रीय फंडों में पहले से ही सक्रिय (Active) रूप से चल रही है, उन्हें बिल्कुल भी घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है:
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पुरानी SIP रहेगी चालू: अधिकांश एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि पहले से पंजीकृत और जारी एसआईपी (Existing SIPs) सामान्य रूप से चलती रहेंगी और आपके बैंक खाते से किस्तें कटती रहेंगी।
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फंड वैल्यू पर असर नहीं: पहले से किए गए निवेश पर इस रोक का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और वह हमेशा की तरह वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव और प्रदर्शन के अनुसार घटता-बढ़ता रहेगा।
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हालांकि, अलग-अलग फंड हाउस के आंतरिक नियम थोड़े भिन्न हो सकते हैं, इसलिए निवेशकों को अपने फोलियो और एएमसी (AMC) से आने वाले ईमेल या ताजा सूचनाओं पर नजर रखनी चाहिए।
ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन के इच्छुक निवेशकों के लिए अब क्या हैं विकल्प?
फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो में वैश्विक विविधीकरण (Global Diversification) यानी अमेरिकी या यूरोपीय बाजारों का एक्सपोजर चाहते हैं, वे फिलहाल खुले हुए एकमात्र विकल्प 'बड़ौदा बीएनपी परिबास एक्वा एफओएफ' पर विचार कर सकते हैं। इसके अलावा, दूसरा विकल्प यह है कि निवेशक तब तक इंतजार करें जब तक कि नियामक संस्थाएं (RBI/SEBI) विदेशी निवेश की इस तय सीमा को बढ़ाने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं कर देतीं। जानकारों का मानना है कि भविष्य में सीमा बढ़ते ही ये सभी 65 फंड दोबारा नए निवेश के लिए खोल दिए जाएंगे। तब तक निवेशकों को किसी भी विदेशी एसेट में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों, निवेश की समय-सीमा और जोखिम क्षमता का मूल्यांकन जरूर कर लेना चाहिए।