Bengal Politics: “ED-CBI के डर से भागे लुटेरों को वापस क्यों बुला रहे?” ऋतब्रत बनर्जी का अभिषेक पर तीखा हमला, मांगा इस्तीफा

कोलकाता/लखनऊ। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीखे तीर चलने शुरू हो गए हैं, जिसने राज्य के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। शनिवार को पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के हालिया बयानों की आक्रामक शब्दों में कड़ी आलोचना की। ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी पर उनके बयानों में घोर विरोधाभास और ढुलमुल रवैया अपनाने का संगीन आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के अघोषित उत्तराधिकारी को ऐसी विरोधाभासी बातें करने से पहले तुरंत अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने हालिया चुनाव नतीजों का हवाला देते हुए टीएमसी नेतृत्व की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।
"ED-CBI के डर से भागे लुटेरों को वापस क्यों बुला रहे?"
ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के रुख में निरंतरता न होने और उनके दोहरे रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "अभिषेक बनर्जी आज कुछ और बात कह रहे हैं, जबकि कल उन्होंने कुछ और कहा था। कल तक वे कह रहे थे कि 'लुटेरे' केंद्रीय एजेंसियों (ED और CBI) के डर से टीएमसी छोड़कर भाग गए हैं, और अगले ही दिन वे उन्हीं बागी नेताओं को पार्टी में वापस आने का न्योता दे रहे हैं। यह पूरी तरह से हास्यास्पद और विरोधाभासी है। अगर उनमें थोड़ी भी नैतिकता है, तो उन्हें खराब चुनाव नतीजों की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए बीते 4 मई को ही अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था।"
60 विधायकों का समर्थन और 2029 के लोकसभा चुनाव की चेतावनी
मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में बेहद मजबूत स्थिति रखने वाले और 60 विधायकों के भारी समर्थन का दावा करने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक को भविष्य की लड़ाई के लिए बड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, "अभिषेक बनर्जी अभी से 2031 के विधानसभा चुनावों के सपने देख रहे हैं, लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि 2031 अभी बहुत दूर है, उससे पहले साल 2029 आएगा। तब उन्हें दोबारा लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरना होगा और बंगाल की जनता इनकी असलियत को अच्छी तरह देख चुकी है। अगली बार बड़ी-बड़ी जीत का दावा करने से पहले, उन्हें खुद चुनाव लड़कर अपनी जमानत राशि बचाने की कोशिश करनी चाहिए।"
अदालत जाएं, सड़कों पर राजनीति न करें: तोड़-फोड़ के मुद्दे पर सलाह
अभिषेक बनर्जी द्वारा हाल ही में उठाए गए सरकारी संपत्तियों या अवैध निर्माणों पर तोड़-फोड़ की कार्रवाई के मुद्दे पर विपक्ष के नेता ने कड़ा रुख अपनाया। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यदि किसी नेता या नागरिक को प्रशासन की कार्रवाई से कोई कानूनी शिकायत है, तो उसका समाधान अदालतों के माध्यम से किया जाना चाहिए, न कि सड़कों पर आकर। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "अगर कोई सरकारी अथॉरिटी आपकी किसी संपत्ति को यह कहकर ढहा रही है कि वह गैर-कानूनी है, जबकि असल में वह वैध है, तो आपके पास कानून का रास्ता खुला है। आपको सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए और वहां से न्याय मांगना चाहिए, न कि इसका राजनीतिकरण करना चाहिए।"
क्या था अभिषेक बनर्जी का वो बागी नेताओं को खुला ऑफर?
इस पूरे विवाद की जड़ में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का वह बयान है, जिसमें उन्होंने पार्टी के बागी सांसदों और विधायकों को खुली चुनौती दी थी। अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि अगर पार्टी छोड़कर गए बागी नेताओं को केवल उनसे (अभिषेक से) कोई व्यक्तिगत समस्या है और इसी वजह से उन्होंने बगावत की है, तो वे सभी गिले-शिकवे भुलाकर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के पास वापस लौट आएं। अभिषेक ने यहां तक दावा किया था कि यदि वे बागी नेता पार्टी में वापस आ जाते हैं, तो वे उनके सम्मान में एक घंटे के भीतर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे। इसी बयान को लेकर अब बंगाल की राजनीति में घमासान मचा हुआ है।