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PNB बैंक फ्रॉड केस में ED का बड़ा एक्शन: 6 आरोपियों के खिलाफ स्पेशल PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन शिकायत दर्ज

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध लेन-देन के मामलों पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पीएनबी की मुजफ्फरपुर (बिहार) शाखा में हुए ₹1.29 करोड़ के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों के खिलाफ पटना स्थित विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत में औपचारिक 'प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट' (चार्जशीट) दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष सभी जरूरी साक्ष्य पेश करते हुए आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई और दोषसिद्धि (Conviction) की मांग की है।

इन 6 आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई औपचारिक चार्जशीट

ईडी द्वारा अदालत में दाखिल आरोपपत्र में जिन छह मुख्य आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं, वे इस प्रकार हैं:

  1. मोहम्मद जफर इकबाल (मुख्य लाभार्थी व साजिशकर्ता)

  2. नितेश कुमार सिंह

  3. संतोष आनंद

  4. राजेश कुमार

  5. मंझय कुमार सिंह

  6. कुंदन कुमार

जांच एजेंसी के अनुसार, इन सभी आरोपियों ने संगठित तरीके से मिलकर बैंक प्रणाली और खाताधारकों के खातों में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी को अंजाम दिया।

सिम-स्वैपिंग तकनीक से दिया गया वारदात को अंजाम, अलर्ट से बेखबर रहे खाताधारक

ईडी की जांच में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बैंक खातों से अवैध निकासी के लिए 'सिम-स्वैपिंग' (SIM Swapping) के साइबर हथकंडे का इस्तेमाल किया था।

  • जालसाजों ने बैंक खातों से जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबरों के डुप्लीकेट सिम जारी करा लिए।

  • सिम बदल दिए जाने के कारण खाताधारकों के असली मोबाइल नेटवर्क बंद हो गए, जिससे उन्हें खातों से हो रहे अनाधिकृत लेन-देन और वन टाइम पासवर्ड (OTP) के एसएमएस अलर्ट प्राप्त नहीं हो सके।

  • इसके बाद आरोपियों ने इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल ट्रांसफर के जरिए विभिन्न खातों से कुल ₹1.29 करोड़ की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर ली।

हवाला और एटीएम कैश डिपॉजिट के जरिए निजी खातों में रूट की गई रकम

जांच में यह भी सामने आया कि खातों से पैसा निकालने के बाद मनी ट्रेल को छुपाने के लिए कई स्तरों पर लेयरिंग की गई। ठगी की गई रकम को तुरंत अलग-अलग डमी बैंक खातों में भेजा गया। जांच एजेंसी को 4 प्रमुख बैंक खातों में लगभग ₹83 लाख की सीधी संदिग्ध गतिविधि मिली। इसके अलावा, राशि का एक बड़ा हिस्सा हवाला चैनलों और विभिन्न शहरों के एटीएम में कैश डिपॉजिट मशीनों के माध्यम से मुख्य आरोपी मोहम्मद जफर इकबाल के व्यक्तिगत बैंक खातों और उसकी प्रोपराइटरशिप फर्म के खातों में रूट किया गया। बाद में इस काले धन को साजिश में शामिल सभी आरोपियों के बीच कमीशन के तौर पर बांट दिया गया।

मनी लॉन्ड्रिंग एंगल पर आगे की जांच जारी

ईडी ने स्पष्ट किया है कि बिहार पुलिस द्वारा दर्ज की गई मूल प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का ईसीआईआर (ECIR) दर्ज किया गया था। यद्यपि छह मुख्य आरोपियों के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर दी गई है, लेकिन वित्तीय लेन-देन, बैंक कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत और इस गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों को खंगालने के लिए मामले में आगे की अग्रिम जांच अभी भी जारी है।

 

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