BREAKING

Pregnancy Health: प्रेग्नेंसी में भूलकर भी न होने दें फोलिक एसिड की कमी, गर्भ में पल रहे शिशु को हो सकता है इस गंभीर बीमारी का खतरा

लखनऊ। गर्भावस्था (Pregnancy) हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और संवेदनशील दौर होता है। इस खास समय में आने वाली मां और गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु, दोनों की सेहत व सुरक्षा को सर्वोपरि माना जाता है। एक स्वस्थ व सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए संतुलित खानपान के साथ-साथ शरीर को कई अति-आवश्यक विटामिनों और खनिजों की जरूरत होती है। यदि इस नाज़ुक समय में महिला के शरीर में पोषण की थोड़ी सी भी कमी हो जाए, तो इसका सीधा व गहरा नकारात्मक असर मां और बच्चे दोनों के शारीरिक विकास पर पड़ सकता है। यही वजह है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologists) प्रेग्नेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर विशेष डाइट चार्ट का पालन करने की सख्त सलाह देते हैं।

क्या है फोलिक एसिड और क्यों है यह गर्भावस्था के लिए संजीवनी?

गर्भावस्था के दौरान जिन चुनिंदा पोषक तत्वों को सबसे अनिवार्य माना गया है, उनमें फोलिक एसिड (Folic Acid) शीर्ष पर आता है। तकनीकी रूप से, फोलिक एसिड असल में 'विटामिन बी9' (Vitamin B9) का एक सिंथेटिक रूप है, जबकि प्रकृति में पाए जाने वाले इसके प्राकृतिक रूप को 'फोलेट' (Folate) कहा जाता है। मानव शरीर में नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण और डीएनए (DNA) बनने की जटिल प्रक्रिया में फोलिक एसिड एक मुख्य भूमिका निभाता है। यही कारण है कि जो महिलाएं प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं या जो पहले से ही प्रेग्नेंट हैं, उनके लिए इसकी पर्याप्त दैनिक मात्रा लेना मेडिकल साइंस में बेहद जरूरी माना गया है।

फोलिक एसिड की कमी से शिशु को हो सकती है यह गंभीर जन्मजात बीमारी

अमेरिका के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संगठन 'ऑफिस ऑन विमेंस हेल्थ' (Office on Women's Health) की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड की कमी होने से गर्भस्थ शिशु का शारीरिक विकास बुरी तरह बाधित हो सकता है।

  • न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defect): शरीर में इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा न होने से बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। यह जन्म से जुड़ी एक बेहद गंभीर और लाइलाज समस्या है, जो नवजात शिशु के दिमाग, रीढ़ की हड्डी (Spine) या स्पाइनल कॉर्ड के प्राकृतिक विकास को पूरी तरह रोक देती है।

  • शुरुआती हफ्तों का महत्व: अक्सर महिलाओं को गर्भावस्था के शुरुआती 3 से 4 हफ्तों में अपनी प्रेग्नेंसी का पता नहीं चल पाता है, जबकि ठीक इसी समय गर्भ के भीतर शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ का ढांचा तेजी से तैयार हो रहा होता है। इसलिए, डॉक्टरों का मानना है कि गर्भधारण करने से पहले से ही महिलाओं को फोलिक एसिड का सेवन शुरू कर देना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के जन्मजात विकार के जोखिम को जड़ से खत्म किया जा सके।

डाइट और सप्लीमेंट: कैसे पूरी करें फोलिक एसिड की दैनिक जरूरत?

फोलिक एसिड की आवश्यक मात्रा को शरीर में बनाए रखने के लिए एक सही संतुलित आहार और डॉक्टरी सप्लीमेंट्स का बेहतरीन तालमेल होना जरूरी है:

  • प्राकृतिक फोलेट के मुख्य स्रोत: महिलाओं को अपनी दैनिक डाइट में गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक, मेथी), विभिन्न प्रकार की बीन्स, हरी मटर, ब्रोकोली, संतरा, नींबू और अन्य खट्टे रसीले फलों को प्रमुखता से शामिल करना चाहिए। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले फोर्टिफाइड अनाज (Fortified Cereals) और ब्रेड भी इसके अच्छे स्रोत हैं।

  • सप्लीमेंट्स की अनिवार्यता: पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रोजमर्रा के भोजन से एक प्रेग्नेंट महिला के लिए आवश्यक फोलिक एसिड की पूरी मात्रा प्राप्त करना हमेशा व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। इसलिए, डॉक्टर की देखरेख में फोलिक एसिड की गोलियां (Supplements) लेना बेहद जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में सप्लीमेंट लेते समय इन 3 मुख्य बातों का रखें विशेष ध्यान:

  1. डॉक्टर की सख्त निगरानी: गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड या कोई भी अन्य मल्टीविटामिन हमेशा किसी योग्य डॉक्टर की पर्ची और बताई गई खुराक (Dose) के अनुसार ही लें। बिना डॉक्टरी परामर्श के मनमाने ढंग से इसकी मात्रा को कम या ज्यादा करने की भूल बिल्कुल न करें।

  2. प्लानिंग के समय ही करें बात: यदि आप भविष्य में गर्भधारण करने की योजना (Pregnancy Planning) बना रही हैं, तो गर्भधारण करने से कम से कम एक-दो महीने पहले ही अपने डॉक्टर से मिलकर फोलिक एसिड शुरू करने की सही सलाह लें।

  3. संतुलित आहार का विकल्प नहीं: फोलिक एसिड की दवाइयां लेने का यह अर्थ कतई नहीं है कि आप अपने खानपान में लापरवाही बरतें। सप्लीमेंट के साथ-साथ एक संपूर्ण, रंग-बिरंगी सब्जियों और फलों से युक्त संतुलित सात्विक डाइट बेहद आवश्यक है ताकि शरीर को आयरन, कैल्शियम और अन्य सभी आवश्यक मैक्रोन्यूट्रिएंट्स भी प्राकृतिक रूप से मिलते रहें।

Back to top button