RBI Plastic Notes: क्या बंद हो जाएंगे 10 और 20 रुपये के पुराने कागज वाले नोट? आरबीआई (RBI) लाने जा रहा है नए प्लास्टिक नोट, जानिए हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय बैंकिंग और करेंसी सिस्टम में जल्द ही एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में 10 रुपये और 20 रुपये के नए प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों को चलन में लाने की तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। इसके लिए बकायदा एक पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और आरबीआई की करेंसी छापने वाली सब्सिडियरी कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने इसके खास मटीरियल (सब्सट्रेट) की खरीद के लिए ग्लोबल टेंडर भी जारी कर दिया है। इस बड़ी खबर के सामने आते ही आम जनता के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे? इन प्लास्टिक नोटों से देश का कितना पैसा बचेगा? आइए इन सभी जरूरी और महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं।
क्यों पड़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत? छपाई खर्च और गंदे नोटों का बढ़ता अंबार
डिजिटल पेमेंट और यूपीआई के रिकॉर्ड विस्तार के बावजूद देश में नकदी (Cash) की मांग लगातार बढ़ रही है। मई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में चलन में मौजूद कुल नकदी रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। नकदी के इस भारी इस्तेमाल के कारण नोटों की छपाई की लागत भी लगातार बढ़ रही है। साल 2024-25 में आरबीआई ने नोट छपाई पर करीब ₹6,373 करोड़ खर्च किए थे, जो हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर ₹4,875 करोड़ रह गए।
छपाई खर्च के अलावा दूसरी सबसे बड़ी समस्या गंदे और फटे नोटों को नष्ट करने की है। वित्त वर्ष 2025 में करीब 2,380 करोड़ गंदे-फटे नोट नष्ट किए गए। इन्हीं भारी-भरकम खर्चों और नोटों की कम उम्र की समस्या से निपटने के लिए आरबीआई ने अब पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों का रुख किया है, जो लंबे समय में बेहद सस्ते और टिकाऊ साबित होते हैं।
प्लास्टिक नोटों की 5 सबसे बड़ी खासियतें: क्यों हैं ये कागज से बेहतर?
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लंबी उम्र (High Durability): पॉलीमर नोट एक विशेष प्रकार की प्लास्टिक शीट से बनते हैं, जिसके कारण ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक समय तक सुरक्षित और चालू हालत में रहते हैं।
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वॉटरप्रूफ और टियरप्रूफ: ये नोट पानी में भीगने से गलते नहीं हैं और इन्हें आसानी से फाड़ा भी नहीं जा सकता। इन पर धूल, मिट्टी और गंदगी भी बहुत कम चिपकती है।
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बैक्टीरिया मुक्त: कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में यह प्रमाणित हो चुका है कि कागज के मुकाबले प्लास्टिक नोटों की सतह पर संक्रामक बैक्टीरिया और वायरस बहुत कम समय तक टिक पाते हैं।
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हाई सिक्योरिटी फीचर्स: इन नोटों में एक पारदर्शी खिड़की (Transparent Window) और अत्याधुनिक सुरक्षा धागे दिए जाते हैं, जिनकी हूबहू नकल करना या नकली (Fake Currency) नोट बनाना नामुमकिन के बराबर होता है।
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ATM फ्रेंडली: भविष्य में देश की सभी एटीएम (ATM) मशीनों को इन नए प्लास्टिक नोटों को आसानी से डिस्पेंस (बाहर निकालने) करने के लिए तकनीकी रूप से अपग्रेड किया जाएगा।
दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में सफल है मॉडल, ओमान भी लिस्ट में शामिल
प्लास्टिक करेंसी अपनाने के मामले में भारत कोई पहला देश नहीं है, बल्कि दुनिया के 60 से अधिक देश इसका सफल इस्तेमाल कर रहे हैं:
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पूरी तरह अपनाने वाले देश: साल 1988 में ऑस्ट्रेलिया 10 डॉलर का प्लास्टिक नोट जारी करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। इसके बाद कनाडा, न्यूजीलैंड, वियतनाम, यूनाइटेड किंगडम (UK), मालदीव और बारबाडोस जैसे देशों ने अपनी करेंसी को पूरी तरह पॉलीमर में बदल दिया। हाल ही में साल 2026 में ओमान ने भी अपना 1-रियाल का नोट पॉलीमर में जारी कर इस सूची में अपनी जगह बनाई है।
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आंशिक रूप से अपनाने वाले देश: सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, श्रीलंका, नेपाल, यूएई, सऊदी अरब और इजराइल जैसे देश कुछ चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों के लिए प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बड़ा सवाल: क्या बंद हो जाएंगे पुराने कागज के नोट? गवर्नर का बयान
आम जनता के बीच फैल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए आरबीआई ने पूरी तरह स्पष्ट किया है कि बाजार में मौजूद पुराने कागजी नोट बिल्कुल भी बंद नहीं होंगे और वे पहले की तरह ही कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य (Legal Tender) बने रहेंगे। चूंकि यह अभी सिर्फ एक पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए केंद्रीय बैंक पहले इसके सीमित ट्रायल के नतीजों और व्यावहारिकताओं का गहन अध्ययन करेगा।
खुद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जून 2026 की हालिया मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ शब्दों में कहा, "पॉलीमर नोटों को पेश करने का प्रस्ताव अभी पूरी तरह विचाराधीन है। केंद्रीय बैंक इसके सभी तकनीकी पहलुओं और नफे-नुकसान का आकलन कर रहा है और इस पर अभी कोई अंतिम मुहर नहीं लगी है।"
कब तक आपके हाथों में आएंगे ये नए नोट? जानिए संभावित तारीख
भारत में प्लास्टिक नोटों का यह विचार नया नहीं है। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने देश के पांच प्रमुख शहरों—कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में 10 रुपये के 100 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करने की योजना बनाई थी, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण वह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था। अब करीब 14 साल बाद आरबीआई ने इसे दोबारा अमलीजामा पहनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह टेंडर प्रक्रिया और शुरुआती ट्रायल पूरी तरह सफल रहता है, तो साल 2027 से इन प्लास्टिक नोटों का फुल-स्केल रोलआउट (व्यापक चलन) पूरे देश के बाजारों में शुरू हो सकता है।