उत्तर प्रदेश

UP Panchayat Election : 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही होंगे ग्रामीण चुनाव, योगी के मंत्री संजय निषाद ने बताई वजह

News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद ही आयोजित किए जाएंगे। मंत्री के इस बयान ने पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटे हजारों संभावित उम्मीदवारों को बड़ा झटका दिया है, जो पिछले कई महीनों से गांवों में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे थे।आरक्षण और कानूनी दांवपेंच ने फंसाया पेंचसंजय निषाद ने चुनाव टलने के पीछे मुख्य रूप से तकनीकी और संवैधानिक कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव एक लंबी प्रक्रिया है और वर्तमान में आरक्षण का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। मंत्री के अनुसार, जब तक पिछड़ों और महिलाओं के आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती और उनकी सही गिनती नहीं हो जाती, तब तक चुनाव कराना संभव नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि कोर्ट भी बिना आरक्षण प्रक्रिया पूरी किए चुनाव की अनुमति नहीं देगा, और इन प्रक्रियाओं को पूरा करने में काफी समय लगेगा।”अपनों से ही भिड़ जाएंगे कार्यकर्ता”: अंदरूनी कलह का डरमंत्री ने चुनाव टालने के पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक गणित भी समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पंचायत चुनाव कराना सत्ताधारी गठबंधन के लिए जोखिम भरा हो सकता है। संजय निषाद ने कहा, “पंचायत चुनाव में अक्सर एक ही गांव से हमारे ही गठबंधन के कई दावेदार आमने-सामने होते हैं। पार्टी किसी एक का समर्थन करेगी, तो बाकी दावेदार नाराज होकर विधानसभा चुनाव में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ेगी, जिसे हम 2027 के मुख्य चुनाव से पहले टालना चाहते हैं।”मंत्री ओपी राजभर के भी बदले सुर, गेंद अब कोर्ट के पाले मेंदिलचस्प बात यह है कि संजय निषाद के सुर में सुर मिलाते हुए पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने भी अपने रुख में बदलाव किया है। जो राजभर अब तक समय पर चुनाव कराने और बैलेट पेपर छपने की बात कर रहे थे, अब वह भी मामले को हाईकोर्ट के पाले में बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सब कुछ न्यायालय के निर्देशों पर निर्भर करेगा। सरकार की इस नई रणनीति से साफ है कि उसका पूरा ध्यान अब ग्रामीण चुनावों के बजाय 2027 की विधानसभा की बिसात बिछाने पर केंद्रित है।उम्मीदवारों में मायूसी, विपक्ष की बढ़ी हलचलसरकार के इस रुख से उन ग्रामीण नेताओं में भारी मायूसी है जो पोस्टर-बैनर और जनसंपर्क के जरिए लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं। वहीं विपक्षी दलों ने इसे सरकार की विफलता और हार का डर बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव टालने से सरकार को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति बनाने का समय मिल जाएगा, लेकिन इसका असर ग्रामीण विकास कार्यों की गति पर भी पड़ सकता है।

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