बड़ी खबर: NCERT अब बना ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’! अब खुद देगा डिग्री और देशभर में खोलेगा नए कैंपस, जानें छात्रों को क्या होगा फायदा

नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो गई है। अब नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) केवल किताबें बनाने और पाठ्यक्रम तय करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक पूर्ण विश्वविद्यालय की तरह काम करेगा। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सिफारिश पर एनसीईआरटी को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ (Deemed-to-be-University) का दर्जा दे दिया है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद अब एनसीईआरटी को अपने कैंपस खोलने और खुद की डिग्री प्रदान करने की शक्ति मिल गई है।तीन साल का लंबा इंतजार खत्म, UGC की सलाह पर सरकार ने लगाई मुहरएनसीईआरटी को यह प्रतिष्ठित दर्जा हासिल करने के लिए तीन साल की लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इसकी शुरुआत साल 2023 में यूजीसी पोर्टल पर आवेदन के साथ हुई थी। लंबी जांच और अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) के बाद, यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने इस पर अपनी सहमति जताई। अंततः 30 जनवरी 2026 को हुई यूजीसी की 595वीं बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 3 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह दर्जा प्रदान किया गया है।इन 6 बड़े संस्थानों को मिला नया रुतबा, अब सीधे NCERT से मिलेगी डिग्रीइस नए दर्जे के तहत एनसीईआरटी की छह प्रमुख घटक इकाइयों को शामिल किया गया है, जो अब सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी का हिस्सा होंगी। इनमें क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE) अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग के साथ-साथ भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को अब किसी दूसरी यूनिवर्सिटी की एफिलिएशन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा; उन्हें सीधे एनसीईआरटी द्वारा मान्यता प्राप्त डिग्री दी जाएगी।टीचर एजुकेशन में आएगा क्रांतिकारी बदलाव, रिसर्च पर रहेगा जोरविशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत के ‘टीचर एजुकेशन इकोसिस्टम’ को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। अभी तक एनसीईआरटी को अपने कोर्स और मूल्यांकन के लिए अन्य विश्वविद्यालयों के नियमों का पालन करना पड़ता था, लेकिन अब परिषद खुद के विशेष पाठ्यक्रम, शोध कार्यक्रम (PhD) और मूल्यांकन फ्रेमवर्क तैयार कर सकेगा। इससे शिक्षकों के प्रशिक्षण में आधुनिकता आएगी और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के आधार पर शिक्षा के स्तर को सुधारा जा सकेगा। छात्रों के लिए अब अधिक विशेषज्ञता वाले और शोध-आधारित प्रोग्राम्स के द्वार खुलेंगे।कड़ी शर्तों के साथ मिला दर्जा, गुणवत्ता बनाए रखना होगा अनिवार्यहालांकि, यह ‘यूनिवर्सिटी’ का दर्जा कई सख्त शर्तों के साथ दिया गया है। एनसीईआरटी किसी भी तरह की ‘मुनाफाखोरी’ वाली गतिविधि में शामिल नहीं हो सकेगा। साथ ही, परिषद को अपनी संपत्ति या फंड ट्रांसफर करने के लिए सरकार और यूजीसी से अनुमति लेनी होगी। संस्थान के लिए हर साल एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में हिस्सा लेना और नैक (NAAC) व एनबीए (NBA) जैसी संस्थाओं से मान्यता बनाए रखना अनिवार्य होगा। नए ऑफ-कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस खोलने के लिए भी सरकार के तय नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।