उत्तर प्रदेश

UP Petrol Crisis : लखनऊ में गहराया पेट्रोल संकट बाल्टी और बोतलों के बढ़े दाम, इंडस्ट्रियल PNG की कीमतों में लगी आग

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत (Petrol Crisis) ने आम जनता और उद्योगों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं और लोग स्टॉक जमा करने की होड़ में लगे हैं। इस संकट का सीधा असर अब घरेलू सामानों और औद्योगिक ईंधन पर भी दिखने लगा है। पिछले 24 घंटों में प्लास्टिक के सामानों की कीमतों में अचानक उछाल आया है, जिससे आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ रही है।बोतल और बाल्टी के दाम में 20% तक की बढ़ोतरीपेट्रोल पंपों पर तेल खत्म होने की अफवाह और सीमित सप्लाई के बीच लोग घरों में पेट्रोल-डीजल स्टोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए प्लास्टिक की बोतलों, कैन (Cans) और बाल्टियों की मांग अचानक बढ़ गई है। लखनऊ के थोक और खुदरा बाजारों में प्लास्टिक के इन सामानों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा देखा गया है। जो गैलन पहले 50-60 रुपये में मिलता था, अब दुकानदार उसके लिए 80 से 100 रुपये तक वसूल रहे हैं।इंडस्ट्रियल PNG की कीमतों में भारी इजाफापेट्रोल-डीजल के संकट के बीच उद्योगों को मिलने वाली इंडस्ट्रियल पीएनजी (Industrial PNG) की दरों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। प्राकृतिक गैस की कीमतों में वैश्विक स्तर पर हुए बदलाव और स्थानीय मांग बढ़ने के कारण औद्योगिक इकाइयों को अब ईंधन के लिए ज्यादा जेब ढीली करनी होगी। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में कांच, लोहा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े उत्पाद महंगे हो सकते हैं।परिवहन ठप होने से बढ़ी महंगाईईंधन की कमी का सबसे बुरा असर माल ढुलाई (Logistics) पर पड़ा है। लखनऊ की मंडियों में फल और सब्जियों की आवक कम हो गई है क्योंकि ट्रक और लोडर पेट्रोल पंपों पर खड़े हैं। डीजल की किल्लत के कारण कई ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों के पहिए जाम कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि अगले 48 घंटों में तेल की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में और अधिक वृद्धि हो सकती है।प्रशासन और तेल कंपनियों का क्या है कहना?जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे पैनिक न हों और तेल का अनावश्यक स्टॉक न करें। तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) का दावा है कि डिपो से सप्लाई सुचारू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह संकट अस्थायी है और रूट डाइवर्जन या लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण कुछ पंपों पर तेल खत्म हुआ है। हालांकि, जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों से अलग है, जहां घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को ‘नो स्टॉक’ का बोर्ड देखना पड़ रहा है।

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