उत्तर प्रदेश

UP SIR Final List : पश्चिमी यूपी में सबसे बड़ी सफाई, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में बढ़े नए चेहरे,जानें क्षेत्रीय आंकड़ों का पूरा गणित

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी अंतिम मतदाता सूची ने सूबे की सियासत के भौगोलिक समीकरण बदल दिए हैं। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जहाँ प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 13.39 करोड़ पर सिमट गई है, वहीं क्षेत्रीय स्तर पर आंकड़ों में भारी विषमता देखी गई है। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ और ‘ASD’ (Absent, Shifted, Dead) मानकों के आधार पर हुई इस छंटनी ने शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच एक बड़ी लकीर खींच दी है।1. पश्चिमी उत्तर प्रदेश: शहरीकरण और पलायन ने बिगाड़ा गणितपश्चिमी यूपी (West UP) वह क्षेत्र है जहाँ सबसे ज्यादा नामों की कटौती हुई है।शहरी केंद्रों में बड़ी गिरावट: गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ जैसे जिलों में मतदाता सूची से औसतन 18% से 22% नाम हटाए गए हैं। गाजियाबाद में तो यह आंकड़ा 20.84% तक पहुंच गया है।कारण: निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर से सटे होने के कारण यहाँ ‘शिफ्टेड’ (प्रवास करने वाले) मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक थी। कई मतदाता जो वर्षों पहले दूसरे राज्यों में बस गए थे, उनके नाम अब पूरी तरह हटा दिए गए हैं।2. पूर्वांचल: नए मतदाताओं का गढ़ बना पूर्वी उत्तर प्रदेशपूर्वांचल (Purvanchal) में मतदाता सूची का स्वरूप पश्चिमी यूपी के विपरीत रहा है। यहाँ नामों की कटौती के मुकाबले ‘नए पंजीकरण’ की संख्या अधिक दर्ज की गई है।प्रमुख जिले: प्रयागराज, जौनपुर और वाराणसी जैसे जिलों में मतदाता संख्या में स्थिरता देखी गई है। प्रयागराज उन टॉप 5 जिलों में शामिल है जहाँ सबसे ज्यादा नए (84 लाख में से) नाम जोड़े गए हैं।युवा वोटर्स: पूर्वांचल में 18-19 आयु वर्ग के पहली बार वोट देने वाले युवाओं (First-time Voters) की संख्या प्रदेश में सबसे अधिक पाई गई है।3. बुंदेलखंड: मृतकों और प्रवासियों के नामों पर चली कैंचीबुंदेलखंड के सातों जिलों (झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट) में मतदाता सूची की ‘सफाई’ का मुख्य आधार ‘मृत’ और ‘डुप्लीकेट’ वोटर्स रहे।डेटा रिफाइनमेंट: बुंदेलखंड में पुराने रिकॉर्ड्स और 2003 की मतदाता सूची से मिलान के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम मिले जो अब वहां निवास नहीं करते। यहाँ छंटनी का प्रतिशत लगभग 12% से 14% के बीच रहा है।क्षेत्रीय तुलनात्मक तालिका (Regional Comparison Table)क्षेत्र (Region)मतदाता संख्या में बदलाव (अनुमानित)मुख्य कारणपश्चिमी यूपी20% तक की गिरावटपलायन, शहरी प्रवास, डुप्लीकेट आईडीपूर्वांचल5% – 8% की शुद्ध वृद्धिनए युवा मतदाता, कम शहरी विस्थापनबुंदेलखंड12% – 15% की गिरावटमृत मतदाता, स्थायी प्रवासअवध क्षेत्र10% – 12% की गिरावटलखनऊ-कानपुर में बड़ी शहरी छंटनीशहरी बनाम ग्रामीण: असली अंतर यहाँ हैविश्लेषण से स्पष्ट है कि जहाँ ग्रामीण यूपी में मतदाता सूची का शुद्धिकरण मुख्य रूप से ‘मृत’ मतदाताओं तक सीमित रहा, वहीं लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे महानगरों में ‘शिफ्टेड’ और ‘अनमैप्ड’ वोटर्स की वजह से सूची छोटी हुई है। विपक्षी दलों ने इस कटौती पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग का दावा है कि यह अब तक की सबसे ‘शुद्ध’ (Purest) मतदाता सूची है।

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