धर्म

Vaikuntha : जब ऋषि दुर्वासा के क्रोध से कांप उठा था वैकुंठ, वो एक श्राप जिसने श्रीहरि को बनाया साधारण मानव

News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में महर्षि दुर्वासा को भगवान शिव के ‘रुद्र’ रूप का अवतार माना जाता है। उनके क्रोध के आगे देवता, दानव और यहाँ तक कि त्रिदेव भी नतमस्तक रहते थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग हैं जहाँ उनके श्राप ने सृष्टि की दिशा बदल दी।1. वैकुंठ में कोलाहल और श्रीहरि को श्रापसबसे प्रसिद्ध प्रसंग तब का है जब महर्षि दुर्वासा भगवान विष्णु से मिलने वैकुंठ पहुँचे।द्वारपालों की भूल: उस समय भगवान विष्णु विश्राम कर रहे थे और द्वारपालों (जय-विजय) ने ऋषि को भीतर जाने से रोक दिया।क्रोध की ज्वाला: अपमानित महसूस कर रहे दुर्वासा ऋषि का क्रोध सातवें आसमान पर पहुँच गया। उनके तेज से वैकुंठ का कोना-कोना कांपने लगा। उन्होंने श्राप दिया कि जिस प्रभु के दर्शन के लिए उन्हें रोका गया, उन्हें स्वयं धरती पर कष्ट सहने के लिए मानव अवतार लेना होगा।परिणाम: इसी श्राप के प्रभाव और अन्य लीलाओं के कारण भगवान विष्णु को राम और कृष्ण जैसे अवतार लेकर मानवीय कष्टों और वियोग को सहना पड़ा।2. राजा अंबरीष और सुदर्शन चक्र का पीछाएक अन्य प्रसंग में, जब दुर्वासा ने भक्त राजा अंबरीष को श्राप देने की कोशिश की:भक्त की रक्षा: भगवान विष्णु ने अपने भक्त की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र को भेज दिया।शरण में ऋषि: सुदर्शन चक्र ने ऋषि दुर्वासा का तीनों लोकों में पीछा किया। जब वे ब्रह्मा और शिव के पास मदद के लिए पहुँचे, तो उन्होंने भी मना कर दिया। अंत में, उन्हें वैकुंठ में श्रीहरि की शरण लेनी पड़ी, जिन्होंने उन्हें वापस राजा अंबरीष से ही क्षमा मांगने को कहा।3. शकुंतला और रुक्मिणी पर कोपशकुंतला: दुर्वासा ने ही शकुंतला को श्राप दिया था कि जिसके ख्यालों में वह खोई है, वह उसे भूल जाएगा। इसी कारण राजा दुष्यंत अपनी प्रियतमा को पहचान नहीं सके थे।देवी रुक्मिणी: एक बार दुर्वासा की शर्त के अनुसार कृष्ण और रुक्मिणी को उनका रथ खींचना था। रास्ते में प्यास लगने पर जब कृष्ण ने रुक्मिणी को पानी पिलाया, तो ऋषि ने क्रोधित होकर रुक्मिणी को कृष्ण से वियोग का श्राप दे दिया।दुर्वासा ऋषि के प्रमुख श्राप और उनके प्रभाव:पात्रकारणपरिणामइंद्र देवऐरावत द्वारा माला का अपमानदेवलोक की श्री (लक्ष्मी) लुप्त हो गईशकुंतलाऋषि के आगमन पर ध्यान न देनाराजा दुष्यंत द्वारा विस्मृतिकृष्ण वंशसाम्ब द्वारा किया गया उपहासयदुवंश का विनाशरुक्मिणीबिना अनुमति जल ग्रहण करनाकृष्ण से 12 वर्ष का वियोग

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