ईरान और पाकिस्तान में भड़का भीषण तनाव: तेहरान ने रोकी एलपीजी की सप्लाई

पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिसका सीधा और दर्दनाक असर आम जनता की रसोई पर पड़ रहा है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालातों और आपसी असहमतियों के बीच ईरान ने पाकिस्तान को होने वाली लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की आपूर्ति को अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस अचानक और बड़े कदम से पाकिस्तान के कई प्रांतों में ईंधन का भयंकर संकट पैदा हो गया है। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में एक घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत आसमान छूते हुए 10 हजार पाकिस्तानी रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुकी है। महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों के लिए दो जून की रोटी पकाना और ठंड के इस मौसम में खुद को गर्म रखना एक बहुत बड़ा संघर्ष बन गया है।
ईरान के इस कड़े फैसले के पीछे की भू-राजनीतिक और आर्थिक वजहें
ईरान और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक और ऊर्जा संबंधी समझौते लंबे समय से आपसी कूटनीति के दायरे में रहे हैं, लेकिन हालिया महीनों में सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा बलों के बीच झड़पों और भुगतान से जुड़े गंभीर विवादों ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास पैदा कर दी है। ईरानी प्रशासन द्वारा यह कदम उठाए जाने के पीछे मुख्य कारण बकाया भुगतान में देरी और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते उत्पन्न जटिलताएं बताई जा रही हैं। ईरान पहले भी कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दे चुका था कि वह समय पर अपने ऊर्जा आयातों का भुगतान करे और सीमा सुरक्षा को पुख्ता करे। जब इस्लामाबाद की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो तेहरान ने अपनी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा हितों को प्राथमिकता देते हुए एलपीजी के निर्यात को तत्काल प्रभाव से रोक दिया। इस फैसले ने पाकिस्तानी हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है क्योंकि वे ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक अपने पड़ोसी देशों पर निर्भर हैं।
पाकिस्तान में गहराया भयंकर ऊर्जा संकट, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा का बुरा हाल
ईरान से गैस की सप्लाई रुकने के बाद पाकिस्तान के बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के कई हिस्सों में हाहाकार मच गया है। आधिकारिक पाइपलाइन गैस की आपूर्ति पहले से ही चरमराई हुई थी, और अब एलपीजी के आयात बंद होने से ब्लैक मार्केटर्स और जमाखोरों की चांदी हो गई है। आम जनता को रसोई गैस सिलेंडर पाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जहां एक सामान्य सिलेंडर के लिए लोगों को 10 हजार रुपये से भी अधिक की भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ रही है। मध्यम वर्गीय परिवार और गरीब तबका इस ऐतिहासिक महंगाई के बोझ तले पूरी तरह से दब चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और सरकार इस संकट से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है, और लोग बिना गैस के लकड़ी और कोयला जलाने को मजबूर हो गए हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर टिकी निगाहें, क्या कोई बीच का रास्ता निकाल पाएगा इस्लामाबाद?
इस गंभीर ऊर्जा संकट से उबरने के लिए पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय और ऊर्जा विभाग पर भारी दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान के साथ चल रहे इस गतिरोध को जल्द ही कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए हल नहीं किया गया, तो पाकिस्तान में आर्थिक और सामाजिक अशांति और अधिक बढ़ सकती है। पाकिस्तान पहले ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज और भयंकर विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है, ऐसे में ऊर्जा आयातों के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशना उसके लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है। ईरान के साथ यह तनाव केवल गैस की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय प्रभुत्व और सुरक्षा समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस्लामाबाद तेहरान को मनाने में सफल हो पाता है या फिर आम जनता को लंबे समय तक इस आसमान छूती महंगाई का सामना करना पड़ेगा।