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IND vs NZ: भुवनेश्वर कुमार का 1434 दिन का लंबा इंतजार खत्म

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह पल किसी बड़े जश्न से कम नहीं था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर अपनी स्विंग और सटीक लाइन-लेंथ के लिए मशहूर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने आखिरकार लंबे अंतराल के बाद टीम इंडिया की नीली जर्सी में धमाकेदार वापसी की। लगभग 1434 दिनों (करीब 4 साल) के लंबे इंतजार के बाद जब भुवनेश्वर कुमार ने मैदान पर कदम रखा, तो क्रिकेट फैंस की निगाहें पूरी तरह से उन्हीं पर टिकी थीं। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में अनुभवी तेज गेंदबाज ने साबित कर दिया कि फॉर्म भले ही कुछ समय के लिए छिप जाए, लेकिन क्लास हमेशा अमर रहती है। उनकी वापसी ने एक बार फिर से भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती और अनुभव का एक नया आयाम दिया है।

पावरप्ले में पुरानी जादूई लय और स्विंग का नजारा पेश करते दिखे भुवनेश्वर

मैच की शुरुआत से ही भुवनेश्वर कुमार ने अपनी पुरानी लय और स्विंग गेंदबाजी की अद्भुत बानगी पेश की। न्यू जीलैंड की पिच पर जहां अमूमन तेज गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में मूवमेंट मिलती है, भुवनेश्वर ने उसका पूरा फायदा उठाया। क्रीज पर उतरते ही उन्होंने अपनी ट्रेडमार्क इनस्विंग और आउटस्विंग गेंदों से कीवी ओपनर्स को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में उन्होंने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का कोई मौका नहीं दिया और अपने अनुभव का पूरा इस्तेमाल करते हुए कई डॉट गेंदें फेंकी। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि नई गेंद से स्विंग कराने की जो कला भुवनेश्वर के पास है, उसका मुकाबला आज भी दुनिया का शायद ही कोई दूसरा गेंदबाज कर सके।

मिचेल को फंसाने के लिए चली खास चाल और बनाया ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड

इस मुकाबले के दौरान भुवनेश्वर कुमार ने न केवल अपनी गेंदबाजी से प्रभावित किया, बल्कि एक बड़ा विश्व कीर्तिमान भी अपने नाम दर्ज कर लिया। अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के पावरप्ले इतिहास में सबसे ज्यादा डॉट गेंदें फेंकने के मामले में उन्होंने न्यूजीलैंड के दिग्गज टिम साउदी को पीछे छोड़ते हुए नंबर वन का ताज अपने नाम कर लिया है। मैच के दौरान उन्होंने अपनी रणनीति और चतुराई से विपक्षी बल्लेबाजों को पूरी तरह उलझाए रखा। जब भी कीवी बल्लेबाज मैदान पर पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे, भुवनेश्वर ने अपनी कटर और चालाक धीमी गेंदों (Slower Ones) के जाल में उन्हें फंसाने का पूरा प्रयास किया। उनकी इसी नपी-तुली गेंदबाजी के दबाव का फायदा टीम के अन्य गेंदबाजों को भी मिला।

टीम इंडिया के गेंदबाजी आक्रमण को मिला अनुभव का बड़ा संबल, सीरीज में रहेगी नजर

भुवनेश्वर कुमार की यह वापसी केवल एक व्यक्तिगत खिलाड़ी का कमबैक नहीं है, बल्कि यह युवा भारतीय गेंदबाजी यूनिट के लिए एक बड़ा मानसिक संबल है। मौजूदा समय में जब टीम इंडिया युवा खिलाड़ियों को मौका दे रही है, ऐसे में भुवनेश्वर जैसा अनुभवी और शांत चित्त गेंदबाज ड्रेसिंग रूम में होना कप्तान और कोच के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। डेथ ओवरों में उनकी समझदारी और पावरप्ले में विकेट निकालने की क्षमता टीम के लिए बेहद अहम साबित हो रही है। इस पूरी सीरीज के दौरान फैंस और क्रिकेट पंडितों की निगाहें भुवनेश्वर कुमार के हर एक स्पेल पर टिकी रहेंगी, क्योंकि उनका यह अनुभव भारत को आगामी बड़ी श्रृंखलाओं में जीत दिलाने की कुंजी साबित हो सकता है।

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