व्यापार

ऑनलाइन खाना मंगाना हुआ और महंगा: अब Cash on Delivery पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज, फूड डिलीवरी कंपनियों ने बढ़ाई फीस; जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के जरिए घर बैठे अपनी पसंदीदा डिश मंगाना अब पहले से अधिक महंगा हो गया है। जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसे प्रमुख क्विक-डिलीवरी और फूड एग्रीगेटर्स ने अपनी फीस संरचना में एक और बड़ा बदलाव किया है। यदि आप ऑनलाइन ऑर्डर करते समय ऑनलाइन पेमेंट (UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग) के बजाय 'कैश ऑन डिलीवरी' (Cash on Delivery / COD) का विकल्प चुनते हैं, तो अब आपको इसके लिए अलग से अतिरिक्त शुल्क (COD Fee / Convenience Charge) चुकाना होगा। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज, जीएसटी और पैकेजिंग चार्ज के बाद इस नए चार्ज ने उन करोड़ों उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दिया है जो डिलीवरी बॉय को खाना मिलने के बाद नकद भुगतान करना सुरक्षित और सहज मानते थे।

COD पर कितने रुपये बढ़े: जेब पर कितना अतिरिक्त बोझ?

फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के तहत कैश ऑन डिलीवरी चुनने पर प्रति ऑर्डर अतिरिक्त राशि जोड़ी जा रही है:

  • सीओडी चार्ज की दर: यदि ग्राहक चेकआउट के समय पेमेंट मोड में 'Cash on Delivery' चुनते हैं, तो बिल में ₹7 से ₹15 तक का अतिरिक्त हैंडलिंग/कन्वीनियंस चार्ज सीधे जुड़ रहा है।

  • जीएसटी का अतिरिक्त असर: इस ₹7 से ₹15 के अतिरिक्त चार्ज पर लागू 18% जीएसटी (GST) भी अलग से देय होगा, जिससे प्रत्येक सीओडी ऑर्डर की कुल लागत लगभग ₹8 से ₹18 तक बढ़ जाएगी।

  • चुनिंदा शहरों में शुरुआत: यह चार्ज देश के टियर-1 और प्रमुख मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और लखनऊ) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू कर अब व्यापक स्तर पर रोलआउट किया जा रहा है।

फूड डिलीवरी कंपनियों ने क्यों लगाया COD पर चार्ज?

कंपनियों के अनुसार, कैश ऑन डिलीवरी की प्रक्रिया उनके लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल लागत को काफी बढ़ा देती है। इस फैसले के पीछे कंपनियों ने मुख्य रूप से ये कारण गिनाए हैं:

  • ऑर्डर कैंसिलेशन और फेक ऑर्डर्स: कंपनियों का डेटा बताता है कि ऑनलाइन प्री-पेड ऑर्डर्स की तुलना में सीओडी ऑर्डर्स में कैंसिलेशन और रिजेक्शन की दर 4 से 5 गुना अधिक होती है। जब राइडर खाना लेकर ग्राहक के दरवाजे पर पहुंचता है और ग्राहक फोन नहीं उठाता या ऑर्डर लेने से मना कर देता है, तो तैयार खाना पूरी तरह बर्बाद हो जाता है और कंपनी को रेस्तरां व डिलीवरी पार्टनर दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है।

  • खुले पैसों और कैश हैंडलिंग का झंझट: नकद लेन-देन में अक्सर छुट्टे पैसों (Change) को लेकर डिलीवरी बॉय और ग्राहकों के बीच विवाद होता है। डिलीवरी पार्टनर को दिनभर भारी नकदी संभालनी पड़ती है, जिससे सुरक्षा जोखिम और समय की बर्बादी दोनों बढ़ती है।

  • डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा: कंपनियां चाहती हैं कि उपभोक्ता यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, वॉलेट या नेट बैंकिंग के जरिए 100% प्री-पेड पेमेंट अपनाएं, ताकि लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी, संपर्क रहित और तेज हो सके।

खाने के एक ऑर्डर पर अब कितने तरह के चार्ज लग रहे हैं?

पहले जहां खाना मंगाने पर केवल खाने की कीमत चुकानी होती थी, वहीं अब ऑनलाइन फूड बिल में कई तरह के अतिरिक्त घटक जुड़ चुके हैं:

  • फूड आइटम कॉस्ट: रेस्तरां द्वारा तय की गई डिश की कीमत।

  • रेस्तरां पैकेजिंग चार्ज: ₹15 से ₹35 (कंटेनर और बैग के लिए)।

  • डिलीवरी फीस: दूरी और मौसम के आधार पर ₹25 से ₹80 तक।

  • प्लेटफॉर्म फीस: प्रत्येक ऑर्डर पर ₹6 से ₹10 तक का अनिवार्य शुल्क।

  • सर्ज/रेन चार्ज: बारिश या त्योहारों के समय अतिरिक्त ₹20 से ₹50 तक।

  • अब नया COD चार्ज: कैश चुनने पर ₹7 से ₹15 तक की अतिरिक्त फीस।

  • जीएसटी: भोजन और सेवाओं पर 5% से 18% का कर।

इस प्रकार, यदि कोई ग्राहक ₹200 का भोजन मंगाता है, तो विभिन्न शुल्कों और टैक्स के जुड़ने के बाद अंतिम बिल ₹290 से ₹320 तक पहुंच जाता है।

इस अतिरिक्त चार्ज से बचने के आसान उपाय

यदि आप हर ऑर्डर पर ₹10 से ₹15 के इस गैर-जरूरी खर्च से बचना चाहते हैं, तो इन आसान विकल्पों को अपना सकते हैं:

  • डिजिटल पेमेंट अपनाएं: ऑर्डर प्लेस करते समय सीधे Google Pay, PhonePe, Paytm या UPI ID के जरिए ऑनलाइन भुगतान करें, जिस पर कोई सीओडी चार्ज नहीं लगता।

  • प्लेटफॉर्म वॉलेट का उपयोग: आप स्विगी मनी या जोमैटो वॉलेट में अग्रिम राशि लोड करके भी वन-क्लिक पेमेंट कर सकते हैं।

  • क्रेडिट कार्ड और बैंक डिस्काउंट्स: डिजिटल पेमेंट करने पर विभिन्न बैंकों के क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर 10% से 20% तक के इंस्टेंट डिस्काउंट और कैशबैक ऑफर्स भी मिलते हैं, जिससे बिल उलटा कम हो जाता है।

Back to top button