ऑफिस में घंटों बैठना और गलत तकिया बन सकता है मुसीबत: गर्दन के दर्द को न करें नजरअंदाज

आज के भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में डेस्क जॉब या कंप्यूटर के सामने लगातार घंटों बैठे रहने की आदत लोगों के लिए एक आम बात बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह छोटी सी आदत आपकी सेहत पर कितना भारी पड़ सकती है? आजकल कम उम्र के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में सर्वाइकल पेन (Cervical Pain) यानी गर्दन और कंधे के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऑफिस में गलत पोश्चर में लंबे समय तक काम करना और रात को सोते समय बहुत ऊंचा तकिया लगाना इस समस्या को और ज्यादा गंभीर बना देता है। अगर समय रहते गर्दन के इस दर्द के कारणों को न समझा जाए और जीवनशैली में सुधार न किया जाए, तो यह परेशानी भविष्य में भयंकर रूप ले सकती है। आइए जानते हैं सर्वाइकल पेन बढ़ने के पीछे की 5 मुख्य वजहें और इससे राहत पाने के कुछ आसान घरेलू उपाय।
सर्वाइकल पेन बढ़ने की 5 प्रमुख और चौंकाने वाली वजहें
गर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी यह समस्या अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ बुरी आदतें इसके लिए जिम्मेदार होती हैं:
-
लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठना: ऑफिस या घर में कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करते समय झुककर बैठना या गर्दन को लगातार एक ही एंगल में झुकाए रखना सर्वाइकल का सबसे बड़ा कारण है।
-
बहुत ऊंचा या सख्त तकिया इस्तेमाल करना: सोते समय गलत मोटाई या बहुत ज्यादा ऊंचा तकिया लगाने से गर्दन की मांसपेशियां रात भर खिंची रहती हैं, जिससे सुबह उठने पर भयंकर जकड़न और दर्द होता है।
-
मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल (Text Neck): आज के समय में लोग घंटों सिर झुकाकर मोबाइल फोन की स्क्रीन पर लगे रहते हैं, जिससे गर्दन के पीछे की नसों और हड्डियों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
-
शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज की कमी: बिल्कुल भी कसरत न करने से गर्दन और कंधे की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे वे वजन और तनाव सहन नहीं कर पाती हैं।
-
तनाव और मानसिक चिंता: अत्यधिक मानसिक तनाव या एंग्जाइटी के कारण शरीर की मांसपेशियां विशेषकर कंधे और गर्दन के हिस्से में सिकुड़ने लगती हैं, जिससे दर्द उभर आता है।
सर्वाइकल पेन से राहत पाने के आसान और असरदार घरेलू उपाय
यदि आपको भी अक्सर गर्दन में खिंचाव या दर्द महसूस होता है, तो इन घरेलू नुस्खों से पा सकते हैं तुरंत आराम:
-
सिकाई (Hot and Cold Compress): दर्द वाले हिस्से पर दिन में दो से तीन बार गर्म पानी की थैली या आइस पैक से सिकाई करें। इससे मांसपेशियों की जकड़न दूर होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
-
हल्की स्ट्रेचिंग और योग: काम के बीच में थोड़ा ब्रेक लें और गर्दन को धीरे-धीरे आगे-पीछे और दाएं-बाएं घुमाएं। इसके अलावा भुजंगासन जैसे योगासन करने से गर्दन को मजबूती मिलती है।
-
सही पोश्चर और आर्थोपेडिक तकिए का इस्तेमाल: सोते समय हमेशा गर्दन को सपोर्ट देने वाले सर्जिकल या आर्थोपेडिक तकिए का ही प्रयोग करें और बैठते समय अपनी पीठ को हमेशा सीधा रखें।
-
तेल से मालिश: गुनगुने सरसों या महानारायण तेल से हल्के हाथों से गर्दन और कंधों की मालिश करने से मांसपेशियों का तनाव कम होता है और दर्द में बहुत राहत मिलती है।