‘ओमकारा’ के 20 साल: पहले आमिर खान को मिला था ‘लंगड़ा त्यागी’ का रोल; सैफ ने बताया कैसे एक फैसले ने बदल दिया उनका करियर

बॉलीवुड की कल्ट क्लासिक फिल्मों में शुमार और विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक 'ओथेलो' ($Othello$) पर आधारित फिल्म ‘ओमकारा’ (Omkara) को रिलीज हुए पूरे 20 साल हो चुके हैं। इस खास मौके पर फिल्म से जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से एक बार फिर सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
इसी कड़ी में, फिल्म में ‘लंगड़ा त्यागी’ का अमर और खूंखार किरदार निभाने वाले अभिनेता सैफ अली खान ने एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म की कास्टिंग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। सैफ ने बताया कि यह ऐतिहासिक किरदार शुरुआत में उनके लिए लिखा ही नहीं गया था, बल्कि इसके लिए निर्देशक की पहली पसंद मिस्टर परफेक्शनिस्ट यानी आमिर खान थे।
आमिर खान और विशाल भारद्वाज के बीच 'क्रिएटिव मतभेद'
सैफ अली खान ने बताया कि फिल्म के निर्देशक विशाल भारद्वाज सबसे पहले इस देहाती, चालाक और विलेन वाले किरदार के लिए आमिर खान को कास्ट करना चाहते थे। आमिर खान को फिल्म का कॉन्सेप्ट और किरदार काफी पसंद भी आया था, लेकिन स्क्रिप्ट और कैरेक्टर के कुछ पहलुओं को लेकर उनकी सोच निर्देशक से थोड़ी अलग थी।
विशाल भारद्वाज और आमिर खान के बीच इस रोल को लेकर कई दौर की बातचीत हुई। दोनों ही सिनेमा के दिग्गज हैं, लेकिन इस किरदार को परदे पर उतारने की 'क्रिएटिव सोच' (Creative Vision) पर दोनों एक पेज पर नहीं आ सके। आखिरकार आपसी मतभेदों के चलते आमिर खान इस प्रोजेक्ट से अलग हो गए।
रोमांटिक हीरो से 'लंगड़ा त्यागी' बनने का रिस्की सफर
आमिर खान के फिल्म छोड़ने के बाद विशाल भारद्वाज ने इस रोल के लिए सैफ अली खान से संपर्क किया। साल 2006 के उस दौर में सैफ अली खान की बॉलीवुड में छवि एक 'चॉकलेट बॉय' या 'अर्बन-रोमैटिक' (शहरी मिजाज वाले) हीरो की थी, जो 'दिल चाहता है', 'कल हो ना हो' और 'हम तुम' जैसी फिल्में कर रहे थे।
ऐसे में जब विशाल भारद्वाज ने उन्हें मेरठ की पृष्ठभूमि वाले एक लंगड़ाकर चलने वाले, गुटखा चबाने वाले और गालियां बकने वाले किरदार 'लंगड़ा त्यागी' के रूप में कास्ट करने का फैसला किया, तो फिल्म इंडस्ट्री के कई पंडितों ने इस फैसले पर हैरानी जताई थी। लोगों को लगा था कि सैफ इस लुक और लहजे में पूरी तरह मिसफिट (गलत चुनाव) साबित होंगे, लेकिन निर्देशक को सैफ की काबिलियत पर पूरा भरोसा था।
सैफ ने बदल दी अपने करियर की तकदीर; मिला नेशनल अवार्ड का सम्मान
सैफ अली खान ने भी इस चुनौती को एक अवसर के रूप में लिया और इस किरदार में पूरी तरह डूब गए। उन्होंने अपनी अर्बन इमेज को तोड़ते हुए अपनी बॉडी लैंग्वेज, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की देहाती बोली, आवाज की पिच और चेहरे के हाव-भाव पर महीनों तक कड़ी मेहनत की।
जब फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो सैफ अली खान ने अपने अभिनय से पर्दे पर ऐसा तहलका मचाया कि मुख्य अभिनेता अजय देवगन के होने के बावजूद पूरी फिल्म सैफ के किरदार के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई। समीक्षकों से लेकर दर्शकों तक, हर कोई सैफ के इस नए और डरावने रूप को देखकर दंग रह गया। इस रोल के लिए सैफ को उस साल कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा गया।
कास्टिंग का एक सही फैसला और इतिहास बन गई फिल्म
साल 2006 में आई 'ओमकारा' में सैफ अली खान और अजय देवगन के अलावा करीना कपूर, कोंकणा सेन शर्मा, बिपाशा बसु और विवेक ओबेरॉय जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी अदाकारी के जलवे बिखेरे थे। दो दशक बीत जाने के बाद भी आज जब भारतीय सिनेमा के इतिहास के सबसे बेहतरीन विलेन्स या किरदारों की सूची बनती है, तो उसमें 'लंगड़ा त्यागी' का नाम सबसे ऊपर आता है। सैफ अली खान का यह किस्सा इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि कभी-कभी कास्टिंग के दौरान हुआ एक छोटा सा बदलाव किसी कलाकार की किस्मत और उसकी पूरी पहचान को हमेशा-हमेशा के लिए बदल देता है।