ITR Filing: क्या हर NRI के लिए विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) की जानकारी देना जरूरी है? टैक्स एक्सपर्ट्स से जानिए ‘Schedule FA’ का पूरा नियम

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन अपने चरम पर है। ऐसे में विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRIs) और विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) रखने वाले करदाताओं के मन में अक्सर एक बड़ा असमंजस रहता है कि क्या उन्हें भी अपने टैक्स रिटर्न में विदेशी संपत्तियों का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है? टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका सीधा और साफ जवाब ‘नहीं’ है। केवल एनआरआई (NRI) होने की वजह से आपको 'Schedule FA' (Foreign Assets) भरना जरूरी नहीं होता। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि संबंधित वित्त वर्ष (Financial Year) में आयकर कानून के तहत आपका रेजिडेंशियल स्टेटस (Residential Status) क्या रहा है।
किसे भरना होगा Schedule FA? रेजिडेंशियल स्टेटस से समझें
भारतीय आयकर कानून के अनुसार, विदेशी संपत्तियों का खुलासा करने का नियम आपकी नागरिकता पर नहीं, बल्कि आपकी टैक्स रेजिडेंसी पर तय होता है:
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Resident and Ordinarily Resident (ROR): यदि कोई करदाता इस श्रेणी (यानी भारत का सामान्य निवासी) में आता है, तो उसके लिए ITR में Schedule FA भरना 100% अनिवार्य है। चाहे आपकी संपत्ति दुनिया के किसी भी कोने में हो, आपको उसका विवरण देना ही होगा।
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NRI (Non-Resident Indian) या RNOR (Resident but Not Ordinarily Resident): यदि आप आयकर नियमों के तहत एनआरआई या आरएनओआर की श्रेणी में आते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में आपको Schedule FA भरने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
इसलिए, कोई भी विदेशी संपत्ति रखने वाले व्यक्ति को अपना रिटर्न दाखिल करने से ठीक पहले अपना सटीक रेजिडेंशियल स्टेटस जरूर कैलकुलेट कर लेना चाहिए।
Schedule FA में विदेशी संपत्ति की कौन-कौन सी जानकारियां देनी होती हैं?
जिन करदाताओं (ROR श्रेणी वाले) पर यह नियम लागू होता है, उन्हें अपनी निम्नलिखित विदेशी परिसंपत्तियों का पूरा और पारदर्शी विवरण देना पड़ता है:
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विदेश में स्थित सभी बैंक खाते (Savings and Current Accounts)
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कस्टडी या डिपॉजिटरी अकाउंट और वित्तीय कंपनियों में जमा पूंजी
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विदेशी कंपनियों के शेयर (Stocks), म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) और बॉन्ड्स
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विदेश में खरीदी गई कोई भी अचल संपत्ति (जैसे मकान, दुकान या जमीन)
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किसी विदेशी ट्रस्ट में हिस्सेदारी या अन्य कोई वित्तीय हित (Financial Interest)
महत्वपूर्ण बिंदु: इस शेड्यूल में न केवल संपत्ति का विवरण, बल्कि संबंधित वित्त वर्ष के दौरान उस खाते का अधिकतम बैलेंस (Peak Balance) और निवेश का कुल मूल्य भी बताना पड़ता है। इसके अलावा, यदि उस विदेशी संपत्ति से कोई कमाई या ब्याज (Income) हुआ है, तो उसे भी ITR में दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
गलत जानकारी देने या छुपाने पर 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत ऐक्शन
टैक्स एक्सपर्ट्स सचेत करते हुए कहते हैं कि विदेशी संपत्ति की जानकारी को छिपाना, छुपाने का प्रयास करना या गलत विवरण देना एक बेहद गंभीर आर्थिक अपराध माना जाता है।
ऐसा करने पर आयकर विभाग द्वारा ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियां) और कर अधिरोपण कानून, 2015 (Black Money Act) के तहत सख्त जांच बैठाई जा सकती है। इसके अंतर्गत करदाता पर भारी-भरकम जुर्माना (Penalty), टैक्स और गंभीर परिस्थितियों में जेल (अभियोजन) जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
सही ITR फॉर्म का चुनाव करना है सबसे आवश्यक
यदि आप पर Schedule FA का नियम लागू होता है और आप अपनी विदेशी संपत्ति का ब्योरा दे रहे हैं, तो फॉर्म चुनते समय विशेष सावधानी बरतें:
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ऐसे करदाता ITR-1 (सहज) या ITR-4 (सुगम) फॉर्म का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं कर सकते, क्योंकि इन फॉर्म्स में विदेशी संपत्तियों का विवरण दर्ज करने के लिए 'Schedule FA' का विकल्प ही मौजूद नहीं होता।
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विदेशी संपत्ति धारकों को अनिवार्य रूप से ITR-2 या व्यावसायिक आय होने पर संबंधित अन्य विस्तृत ITR फॉर्म (जैसे ITR-3) ही भरना पड़ता है।
टैक्स एक्सपर्ट्स की अंतिम सलाह: अपना आईटीआर (ITR) फाइनल सबमिट करने से पहले अपने रेजिडेंशियल स्टेटस, विदेशी आय के स्रोतों और विदेशी संपत्तियों के बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से जांच कर लें। इससे आपका रिटर्न त्रुटिहीन दाखिल होगा और भविष्य में आयकर विभाग (Income Tax Department) की ओर से किसी भी प्रकार के स्क्रूटनी नोटिस या कानूनी पचड़े की आशंका न के बराबर हो जाएगी।