मालदीव के संकटमोचक बने PM मोदी मुइज्जू सरकार को डूबने से बचाने के लिए भारत ने खोला खजाना, जारी किए 30 अरब रुपये

News India Live, Digital Desk:’इंडिया आउट’ का नारा देकर सत्ता में आए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को आखिरकार भारत की ही शरण में आना पड़ा है। मालदीव में गहराते आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा और दरियादिली भरा फैसला लिया है। नई दिल्ली ने मालदीव की मुइज्जू सरकार को बड़ी राहत देते हुए ‘सार्क मुद्रा विनिमय’ (SAARC Swap Framework) के तहत 30 अरब रुपये (लगभग 35.8 करोड़ डॉलर) की निकासी को मंजूरी दे दी है। भारत के इस कदम को मालदीव को दिवालिया होने से बचाने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।मुइज्जू सरकार पर मंडरा रहा था डिफॉल्टर होने का खतरापिछले कुछ महीनों से मालदीव की आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई थी। पर्यटन में गिरावट और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे मालदीव के पास अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी डॉलर नहीं बचे थे। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने मालदीव को ‘डिफॉल्ट’ की श्रेणी में डालने की चेतावनी दी थी। ऐसे में जब चीन और अन्य देशों ने हाथ पीछे खींच लिए, तब भारत ने ‘पड़ोसी प्रथम’ (Neighbor First) नीति का परिचय देते हुए मुइज्जू सरकार को यह लाइफलाइन प्रदान की है।सार्क स्वैप फ्रेमवर्क के तहत मिली बड़ी मददभारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से दी गई यह वित्तीय सहायता मालदीव को दो किश्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत मालदीव का केंद्रीय बैंक अपनी तात्कालिक विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा कर सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि भारत का मालदीव की जनता के प्रति एक मजबूत कूटनीतिक संदेश है। इस राशि का उपयोग मालदीव अपने अंतरराष्ट्रीय भुगतानों और आयात बिलों को चुकाने के लिए करेगा, जिससे वहां जरूरी वस्तुओं की किल्लत नहीं होगी।चीन की चालबाजी और भारत की ‘बड़े भाई’ वाली भूमिकाराष्ट्रपति मुइज्जू ने कार्यभार संभालते ही चीन की ओर झुकाव दिखाया था और भारतीय सैनिकों की वापसी की मांग की थी। हालांकि, जब आर्थिक संकट ने दस्तक दी, तो चीन की ओर से वैसी मदद नहीं मिली जैसी उम्मीद की गई थी। भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मुश्किल वक्त में केवल वही एक सच्चा और भरोसेमंद पड़ोसी है। इस मदद के बाद मालदीव के भीतर भी मुइज्जू की भारत विरोधी नीतियों की आलोचना तेज हो गई है और भारत के प्रति सम्मान बढ़ा है।रिश्तों में जमी ‘बर्फ’ पिघलने के संकेत?भारत की इस बड़ी आर्थिक मदद के बाद जानकारों का मानना है कि नई दिल्ली और माले के बीच कूटनीतिक संबंधों में जमी बर्फ पिघल सकती है। हाल के दिनों में मालदीव के मंत्रियों और स्वयं राष्ट्रपति मुइज्जू के सुर भारत को लेकर नरम पड़े हैं। इस 30 अरब रुपये की मदद ने न केवल मालदीव की अर्थव्यवस्था को ऑक्सीजन दी है, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को भी फिर से स्थापित किया है।