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नेपाल में फिर विनाशकारी तबाही का साया: भोटे कोशी नदी में बढ़ा बाढ़ का बहाव, रसुवा समेत 5 जिलों में हाई अलर्ट, तिब्बत में बनी बैरियर झील से और बढ़ा खतरा

नेपाल के उत्तरी पर्वतीय जिले रसुवा में 26 अगस्त 2026 की प्रलयंकारी आपदा के बाद एक बार फिर बाढ़ और भूस्खलन का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने आपातकालीन अलर्ट जारी करते हुए बताया है कि रसुवा स्थित भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव और गर्जना अचानक फिर बढ़ गई है। प्रशासन ने नदी के तटीय इलाकों में चल रहे राहत एवं बचाव दलों (Rescue Teams) और स्थानीय नागरिकों को तत्काल ऊंचे व सुरक्षित स्थानों पर जाने के सख्त निर्देश दिए हैं। हालिया सैलाब की तबाही से जूझ रहे रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों के निचले इलाकों में प्रशासन ने 'रेड अलर्ट' जैसी सतर्कता बरतने को कहा है।

26 अगस्त की त्रासदी के बाद का मंजर: 675 से ज्यादा मौतें और हजारों लापता

नेपाल-तिब्बत सीमा पर लांगटांग लिरुंग और सांग्बु री पर्वत चोटियों के पास ग्लेशियर टूटने और भारी लैंडस्लाइड के कारण 26 अगस्त को ल्हेंदे खोला और भोटे कोशी नदी में 75 किमी/घंटे की रफ्तार से भीषण फ्लैश फ्लड आया था। इस अप्रत्याशित जलप्रलय ने रसुवा के सीमावर्ती तिमुरे बाजार, स्याफ्रुबेसी और सीमा चौकियों को पूरी तरह तबाह कर दिया।

  • मौतों का आंकड़ा: पुलिस और आपदा प्रबंधन के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 675 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं।

  • लापता लोगों की तलाश: 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं, जिनमें स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी पर्यटक और विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले मजदूर शामिल हैं।

  • बुनियादी ढांचे को क्षति: त्रिशूली कॉरिडोर में दर्जनों कंक्रीट पुल, सड़कें, होटल, मकान और कई बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स मलबे में तब्दील हो चुके हैं।

तिब्बत में बनी 'बैरियर लेक' ने बढ़ाई नेपाल और भारत की धड़कनें

भोटे कोशी नदी में दोबारा जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण तिब्बत सीमा के पास मलबे के जमाव से बनी एक विशाल कृत्रिम झील (Barrier Lake) है। चीनी जल संसाधन मंत्रालय और उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, चोछेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर भारी भूस्खलन और हिम मलबे के कारण पानी का प्राकृतिक निकास रुक गया है, जिससे वहां लगभग 25 से 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है। चीनी और नेपाली वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह अस्थायी प्राकृतिक बांध कभी भी फूट सकता है। यदि यह बैरियर लेक टूटती है, तो लाखों गैलन पानी और कीचड़ का सैलाब एक बार फिर भोटे कोशी और आगे चलकर त्रिशूली नदी तंत्र में भीषण तबाही मचा सकता है।

भारी बारिश का नया अलर्ट: बचाव कार्यों में आ रही बाधाएं

नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (DHM) ने आगामी दिनों में बागमती, गंडकी, कोशी और कर्णाली प्रांतों के पहाड़ी इलाकों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश का नया पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विज्ञानी हरि प्रसाद दहाल के अनुसार, रसुवा के भोटेकोशी जलग्रहण क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश से मिट्टी अत्यधिक नम और कमजोर हो गई है, जिससे नए भूस्खलन का जोखिम बढ़ गया है। खराब मौसम और घने बादलों के चलते नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और निजी हेलिकॉप्टरों द्वारा चलाए जा रहे हवाई रेस्क्यू अभियानों में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं।

सेना और अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू टीमों का संयुक्त महाअभियान

नेपाल सरकार ने पूरी मशीनरी को हाई अलर्ट पर रखा हुआ है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देशों के बाद 18,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी और 16 हेलिकॉप्टरों का बेड़ा जमीनी और हवाई रेस्क्यू में जुटा है। अब तक 7,500 से अधिक लोगों को बाढ़ प्रभावित दुर्गम इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत और चीन की तकनीकी टीमें और आपदा राहत विशेषज्ञ भी सैटेलाइट मैपिंग और ग्राउंड रेस्क्यू में नेपाली प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी अलर्ट: गंडक और कोशी पर नजर

चूंकि भोटे कोशी नदी का जल प्रवाह आगे चलकर त्रिशूली और नारायणी नदी से होते हुए भारत के बिहार में गंडक नदी तंत्र में प्रवेश करता है, इसलिए नेपाल में आए इस ताजा उफान को देखते हुए बिहार के पश्चिमी चंपारण (वाल्मीकि नगर), गोपालगंज और पूर्वी चंपारण में भी जल संसाधन विभाग और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को सतर्क कर दिया गया है। प्रशासन बैराजों पर पानी के डिस्चार्ज और गाद की सघन निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी अचानक आने वाले जलप्रवाह से सीमावर्ती गांवों को सुरक्षित रखा जा सके।

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