धर्म

संतान सुख और लंबी आयु के लिए बहुला चौथ पर ऐसे करें गौमाता की पूजा, नोट करें सही तिथि व शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में भाद्रपद (भादों) मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को 'बहुला चतुर्थी' या 'बहुला चौथ' के नाम से जाना जाता है। इसे कई स्थानों पर 'बोल चौथ' भी कहा जाता है। यह पावन व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान के उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु, संकटों से रक्षा और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखती हैं। इसके साथ ही, जिन दंपतियों को लंबे समय से संतान सुख की प्रतीक्षा है, उनके लिए इस दिन का व्रत और गौमाता की सेवा अचूक फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चौथ के दिन भगवान श्री कृष्ण, भगवान श्री गणेश और कामधेनु स्वरूपा 'बहुला गाय' तथा उसके बछड़े की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

बहुला चौथ 2026: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चौथ का पर्व मनाया जाता है। इस दिन शाम के समय प्रदोष काल में पूजन का विशेष महत्व होता है।

  • चतुर्थी तिथि का आरंभ: 30 अगस्त 2026 को दोपहर बाद से

  • चतुर्थी तिथि का समापन: 31 अगस्त 2026 को दोपहर के समय

  • प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:30 बजे से रात्रि 08:45 बजे तक

  • चंद्रोदय का समय: रात्रि 09:15 बजे के आसपास (स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव)

संतान सुख के लिए बहुला चौथ की संपूर्ण और प्रमाणिक पूजा विधि

यदि आप संतान प्राप्ति या अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए यह व्रत रख रहे हैं, तो इस विधि से पूजन संपन्न करें:

  • प्रातः काल का संकल्प: सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संतान की कुशलता व मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत का संकल्प लें।

  • मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना: पूजा स्थान पर एक साफ चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान श्री कृष्ण, श्री गणेश के साथ मिट्टी से बनी बहुला गाय और उसके बछड़े की प्रतिमा स्थापित करें। यदि साक्षात गाय-बछड़ा उपलब्ध हों, तो उनकी प्रत्यक्ष पूजा करें।

  • विधि-विधान से अभिषेक व श्रृंगार: गौमाता और बछड़े को जल से स्नान कराएं, रोली, चंदन और हल्दी का तिलक लगाएं। गौमाता के सींगों पर सिंदूर और घी लगाएं तथा उन्हें ताजे फूलों की माला पहनाएं।

  • विशेष नैवेद्य और भोग अर्पण: गौमाता को हरे चारे, जौ, भुने हुए चने, गेहूं के आटे से बने मीठे पेड़े और गुड़ का भोग लगाएं। भगवान श्री कृष्ण को माखन-मिश्री और श्री गणेश को दूर्वा व मोदक अर्पित करें।

  • कथा श्रवण और आरती: चौकी के समक्ष बैठकर बहुला गाय और शेर की पौराणिक व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान कृष्ण और गौमाता की आरती उतारें।

  • चंद्रमा को अर्घ्य: रात्रि में चंद्रोदय के समय तांबे या चांदी के लोटे में कच्चा दूध, जल, अक्षत और रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और संतान की दीर्घायु की प्रार्थना करें।

बहुला चौथ व्रत के कड़े नियम: इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • दूध और डेयरी उत्पादों का त्याग: इस व्रत का सबसे प्रमुख और अनिवार्य नियम यह है कि व्रती महिला को इस दिन गाय के दूध, दही, घी, मक्खन या पनीर से बनी किसी भी वस्तु का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन के दूध पर केवल बछड़े का अधिकार होता है।

  • चाकू से कटी वस्तुओं का निषेध: बहुला चौथ के दिन भोजन में चाकू या हंसिए से काटी गई सब्जियों, फलों और अनाजों के सेवन से परहेज किया जाता है। व्रती महिलाएं इस दिन बिना कटी सात्विक चीजों, फलाहार अथवा भुने अनाजों का ही सेवन करती हैं।

  • गौ सेवा का महत्व: इस दिन किसी भी परिस्थिति में गाय या बछड़े को प्रताड़ित न करें और न ही उन्हें दुत्कारें। यदि घर के आसपास गौशाला हो, तो वहां जाकर स्वयं अपने हाथों से गायों को चारा और पानी जरूर खिलाएं।

पौराणिक महत्व: क्यों ली थी भगवान श्री कृष्ण ने बहुला गाय की परीक्षा?

पौराणिक कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने 'बहुला' नामक कामधेनु गाय की सत्यनिष्ठा और कर्तव्यपरायणता की परीक्षा लेने के लिए एक हिंसक सिंह (शेर) का रूप धारण किया था। जब जंगल में सिंह ने बहुला को अपना शिकार बनाना चाहा, तो बहुला ने हाथ जोड़कर विनती की कि उसका छोटा बछड़ा घर पर भूखा है; वह उसे दूध पिलाकर स्वयं लौट आएगी। सिंह के अविश्वास जताने पर बहुला ने सत्य और धर्म की शपथ ली। अपने वचन का पालन करते हुए जब बहुला अपने बछड़े को दूध पिलाकर और उसे सुरक्षित छोड़कर नियत समय पर सिंह के सामने प्रस्तुत हुई, तो भगवान श्री कृष्ण अपने वास्तविक रूप में प्रकट हो गए। भगवान ने बहुला के सत्य, ममता और त्याग से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी को जो भी भक्त बहुला गाय की पूजा करेगा, उसकी संतान पर कभी कोई संकट नहीं आएगा और सूनी गोद भी संतानों की किलकारियों से भर जाएगी।

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