धर्म

रामायण से महाभारत तक वे 7 अमर योद्धा जो दोनों महाकाव्यों के रहे साक्षी, जानें इनकी अनसुनी कहानियां

News India Live, Digital Desk : भारतीय पौराणिक इतिहास में रामायण और महाभारत दो ऐसे महाकाव्य हैं, जिनके बीच हजारों वर्षों का अंतर माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ ऐसे भी ‘महारथी’ थे जो त्रेता युग (रामायण) में भी मौजूद थे और द्वापर युग (महाभारत) के भीषण युद्ध के भी गवाह बने? इन योद्धाओं को ‘चिरंजीवी’ या दिव्य शक्तियों से संपन्न माना जाता है। आइए जानते हैं उन पौराणिक पात्रों के बारे में जिनका अस्तित्व राम और कृष्ण, दोनों अवतारों के समय रहा।1. महाबली हनुमान (Lord Hanuman)रामायण में भगवान राम के परम भक्त और संकटमोचक हनुमान की भूमिका से हर कोई परिचित है। महाभारत काल में भी हनुमान जी जीवित थे। पांडवों के वनवास के दौरान भीम का अहंकार तोड़ने के लिए उन्होंने एक वृद्ध वानर का रूप धारण किया था। इतना ही नहीं, कुरुक्षेत्र के युद्ध में वे अर्जुन के रथ के ध्वज पर विराजमान थे और पूरे युद्ध के दौरान पांडवों की रक्षा की।2. भगवान परशुराम (Lord Parshuram)भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम रामायण में सीता स्वयंवर के दौरान लक्ष्मण और राम से संवाद करते नजर आते हैं। वहीं, महाभारत काल में वे भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महारथियों के गुरु थे। उन्होंने भीष्म और कर्ण को अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी थी, जो महाभारत युद्ध के मुख्य आधार बने।3. जामवंत (Jambavan)रामायण में वानर सेना के सेनापति और बुद्धिमान सलाहकार जामवंत ने ही हनुमान जी को उनकी शक्तियों की याद दिलाई थी। महाभारत काल में भगवान कृष्ण के साथ उनका ‘स्यमंतक मणि’ को लेकर युद्ध हुआ था। बाद में कृष्ण की असलियत जानकर उन्होंने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण से कर दिया था।4. ऋषि दुर्वासा (Sage Durvasa)अपने क्रोध के लिए प्रसिद्ध ऋषि दुर्वासा का उल्लेख दोनों महाकाव्यों में मिलता है। रामायण में उन्होंने राजा दशरथ के भविष्य को लेकर भविष्यवाणी की थी। वहीं महाभारत में उन्होंने ही कुंती को वह मंत्र दिया था, जिससे उन्होंने देवताओं का आह्वान कर पुत्र प्राप्त किए। वे दुर्योधन के महल में भी अतिथि बनकर गए थे।5. मय दानव (Mayasura)रावण के ससुर और मंदोदरी के पिता मय दानव रामायण काल के महान वास्तुकार थे। महाभारत में खांडव प्रस्थ के दहन के समय भगवान कृष्ण ने उन्हें जीवनदान दिया था, जिसके बदले में उन्होंने पांडवों के लिए अद्भुत ‘मय सभा’ (इंद्रप्रस्थ का महल) का निर्माण किया था।6. ऋषि मार्कंडेय (Sage Markandeya)अल्पायु होने के बावजूद शिव कृपा से अमरत्व प्राप्त करने वाले ऋषि मार्कंडेय ने रामायण में भगवान राम से मुलाकात की थी। महाभारत काल में जब पांडव वनवास काट रहे थे, तब ऋषि मार्कंडेय ने उन्हें रामायण की कथा सुनाई थी और धर्म का मार्ग समझाया था।7. विभीषण (Vibhishana)रावण के छोटे भाई विभीषण, जो धर्म की राह पर चले, उन्हें भी चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है। रामायण के बाद उन्हें लंका का राजा बनाया गया था। महाभारत के दौरान युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के समय सहदेव जब दक्षिण दिशा की विजय के लिए निकले थे, तब विभीषण ने पांडवों की अधीनता स्वीकार की थी और उपहार भेजे थे।

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