शेयर बाजार ने रचा नया इतिहास, 35 साल का ऑल टाइम रिकॉर्ड टूटा

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने आज इतिहास के पन्नों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। दलाल स्ट्रीट पर आज वो हुआ जिसकी कल्पना बाजार के बड़े-बड़े दिग्गज भी नहीं कर पा रहे थे। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे बीते 35 सालों का सबसे बड़ा तेजी का रिकॉर्ड पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। बाजार की इस अभूतपूर्व रैली ने न केवल घरेलू निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत के मजबूत वित्तीय तंत्र का डंका बजा दिया है। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में लिवाली का जबर्दस्त माहौल बना हुआ था और दिन का खेल खत्म होने तक निफ्टी और सेंसेक्स रिकॉर्ड अंकों की बढ़त के साथ बंद हुए। इस रिकॉर्डतोड़ तेजी के साथ ही भारतीय शेयर बाजार की कुल वैल्यू में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
निवेशकों पर हुई पैसों की जबरदस्त बारिश, बीएसई का मार्केट कैप ₹29.57 लाख करोड़ बढ़ा
शेयर बाजार के इस रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष फायदा आम और खास निवेशकों की जेब को मिला है। मात्र कुछ ही कारोबारी सत्रों के भीतर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) ₹29.57 लाख करोड़ की विशाल रकम से बढ़ गया है। निवेशकों की संपत्ति में आई इस भारी-भरकम बढ़ोतरी ने बाजार में नए रिटेल निवेशकों के उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। बैंकिंग, आईटी, ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई। लार्जकैप कंपनियों से लेकर मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हरे निशान के साथ दिन के उच्चतम स्तर पर कारोबार करते नजर आए। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि निवेशकों के पोर्टफोलियो में आया यह ऐतिहासिक उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के शानदार नतीजों का सबसे बड़ा प्रमाण है।
आखिर शेयर बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी तेजी? जानिए बाजार में आए महातूफान के 5 सबसे बड़े कारण
शेयर बाजार में 35 साल के रिकॉर्ड को तोड़ने वाली इस धमाकेदार तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार रहे हैं, जिन्होंने मिलकर भारतीय बाजारों को रॉकेट की रफ्तार दे दी:
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तूफानी वापसी: पिछले कुछ समय से भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे विदेशी निवेशकों ने एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार पर अपना भरोसा जताया है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के स्थिर प्रदर्शन को देखते हुए एफआईआई ने भारतीय इक्विटी में भारी-भरकम पूंजी का निवेश किया है।
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जीडीपी ग्रोथ और भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद: भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रही है। रिजर्व बैंक (RBI) की संतुलित मौद्रिक नीतियों, नियंत्रित मुद्रास्फीति और देश में लगातार बढ़ रही विनिर्माण व सेवा गतिविधियों ने निवेशकों के भरोसे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
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कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजे (Q2/Q3 Results): चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की प्रमुख दिग्गज कंपनियों ने अनुमान से काफी बेहतर वित्तीय परिणाम पेश किए हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर के मुनाफे में दर्ज की गई इस दोहरे अंकों की वृद्धि ने दलाल स्ट्रीट पर खरीदारी के माहौल को और अधिक मजबूत करने का काम किया।
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वैश्विक बाजारों से मिले बेहद सकारात्मक संकेत: अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेत और एशियाई बाजारों में लौटी तेजी का सीधा लाभ भारतीय शेयर बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई स्थिरता ने भी भारतीय कंपनियों की इनपुट लागत को कम करने में मदद की है।
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घरेलू रिटेल निवेशकों और म्यूचुअल फंड SIP का मजबूत सहारा: भारतीय रिटेल निवेशकों द्वारा सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने किया जा रहा रिकॉर्ड निवेश बाजार के लिए एक मजबूत ढाल साबित हो रहा है। डीमैट खातों की बढ़ती संख्या और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की निरंतर खरीदारी ने बाजार को नीचे गिरने से बचाया और एक नया इतिहास रचने की जमीन तैयार की।
क्या शेयर बाजार में तेजी का यह सिलसिला आगे भी रहेगा बरकरार? जानिए मार्केट एक्सपर्ट्स की राय
दलाल स्ट्रीट पर आई इस ऐतिहासिक तेजी के बाद अब हर छोटे-बड़े निवेशक के मन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि क्या शेयर बाजार की यह रफ्तार आगे भी इसी तरह जारी रहेगी या इसमें कोई सुधार (Correction) देखने को मिलेगा। बाजार के प्रमुख रणनीतिकारों और विश्लेषकों का मानना है कि भले ही अल्पकालिक (Short-term) स्तर पर थोड़ी-बहुत मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबी अवधि (Long-term) के लिए भारतीय शेयर बाजार का आउटलुक बेहद सकारात्मक और बुलिश बना हुआ है। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का भारी जोर और डिजिटल क्रांति आने वाले वर्षों में भी शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। एक्सपर्ट्स ने आम निवेशकों को सलाह दी है कि वे किसी भी तेजी में बहने के बजाय गुणवत्तापूर्ण और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में चरणबद्ध तरीके से निवेश जारी रखें।