धर्म

Garuda Purana : मृत्यु के बाद यमलोक में मिलती है ऐसी खौफनाक सजाएं, जानें किस पाप के लिए कौन सा नरक है तय

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म के 18 पुराणों में ‘गरुड़ पुराण’ का विशेष महत्व है। इसे केवल मृत्यु के बाद पढ़ा जाने वाला ग्रंथ समझना एक भूल है, बल्कि यह जीवन जीने का सही मार्ग और कर्मों के फल का आईना है। गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने अपने वाहन पक्षीराज गरुड़ को विस्तार से बताया है कि इंसान के कौन से कर्म उसे स्वर्ग की ओर ले जाते हैं और कौन से कुकृत्य उसे नर्क की धधकती आग में झोंक देते हैं। अगर आप भी अनजाने में गलतियां कर रहे हैं, तो यमलोक के इन दंडों के बारे में जानकर आपकी रूह कांप जाएगी।झूठ बोलने और धोखाधड़ी करने वालों के लिए ‘रौरव’ नरक गरुड़ पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों से झूठ बोलते हैं या व्यापार में मिलावट और धोखाधड़ी करते हैं, उन्हें ‘रौरव’ नरक में स्थान मिलता है। यहाँ पापी को कड़कती धूप और गर्म रेत पर चलने के लिए विवश किया जाता है। शास्त्रों में स्पष्ट है कि दूसरों का हक मारने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद कभी शांति नहीं पाता और उसे यमदूतों के कड़े प्रहार सहने पड़ते हैं।स्त्री अपमान और अधर्म करने वालों को मिलती है सबसे कठोर सजा गरुड़ पुराण में स्त्रियों के सम्मान को सर्वोपरि रखा गया है। जो पुरुष पराई स्त्री पर बुरी नजर डालते हैं या महिलाओं का अपमान करते हैं, उनके लिए ‘तामिस्र’ नरक का द्वार खुलता है। यहाँ पापी को अंधेरी कोठरियों में रखा जाता है और लोहे की गर्म छड़ों से दंडित किया जाता है। इसके अलावा, जीव-जंतुओं को सताने वाले और निर्दोषों की हत्या करने वालों को खौलते तेल के कड़ाहे में डाल दिया जाता है, जिसे ‘कुंभीपाक’ नरक कहा गया है।धर्म की राह और अच्छे कर्म ही बचाएंगे यमराज के दंड से भगवान विष्णु कहते हैं कि मृत्यु के बाद आत्मा का सफर उसके कर्मों पर निर्भर करता है। दान-पुण्य, बुजुर्गों की सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने वाली आत्माओं को यमलोक के कष्ट नहीं सहने पड़ते। गरुड़ पुराण हमें चेतावनी देता है कि शरीर नश्वर है लेकिन कर्म अमर हैं। इसलिए समय रहते अपने आचरण में सुधार करना ही नरक के द्वार से बचने का एकमात्र उपाय है।

Back to top button