उत्तर प्रदेश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 200 किलो चांदी की ईंटों के गायब होने के आरोपों पर ट्रस्ट का बड़ा जवाब, सामने रखीं पिघली चांदी की तस्वीरें

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और दान में हेरफेर के मामले में आए दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। इसी बीच, साल 2021 में सिंधी समाज द्वारा दान की गई 200 किलो चांदी की ईंटों को लेकर उपजे विवाद पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक जवाब जारी कर स्थिति साफ कर दी है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने अपने लेटर हेड पर 'विश्व सिंधी फोरम' और 'विश्व सिंधी सेवा संगम' को पत्र लिखकर आश्वस्त किया है कि समाज द्वारा श्रद्धापूर्वक दान की गई चांदी की एक-एक ईंट पूरी तरह सुरक्षित है।

सिंधी समाज ने पत्र लिखकर पूछा था— कहां गई 200 किलो चांदी?

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब विश्व सिंधी सेवा संगम ने कुछ दिनों पहले राम मंदिर ट्रस्ट को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। इस पत्र में समाज ने सवाल उठाया था कि 26 जनवरी 2021 को उनके द्वारा रामलला के चरणों में अर्पित की गई 200 किलो चांदी की ईंटों का आखिर क्या हुआ? सिंधी समाज का आरोप था कि दान दिए जाने के इतने साल बीत जाने के बाद भी उन्हें ट्रस्ट की तरफ से न तो कोई आधिकारिक रसीद (Official Receipt) मिली और न ही यह जानकारी दी गई कि इस चांदी का उपयोग मंदिर निर्माण में कहां और कैसे किया गया।

ईंटें पिघलाकर बनाई गईं 20-20 किलो की सिली (Silver Bars)

विवाद बढ़ता देख राम मंदिर ट्रस्ट ने दस्तावेजों और तस्वीरों के साथ अपना पक्ष रखा है। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के मुताबिक:

  • दान में मिलीं सभी चांदी की ईंटों का पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के 'मूल्यवान धातु रजिस्टर' (Valuable Metal Register) में पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज है।

  • सुरक्षा और बेहतर रखरखाव के मद्देनजर, ट्रस्ट बोर्ड ने बाद में एक नीतिगत फैसला लिया। इसके तहत सिंधी समाज की ईंटों समेत मंदिर में आए अन्य चांदी के दानों व बर्तनों को पिघलाया गया।

  • पिघलाने के बाद 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाली 20-20 किलो की सिल्वर बार (चांदी की सिली) तैयार कराई गईं।

ट्रस्ट ने अपने जवाब के साथ बकायदा वे तस्वीरें भी संलग्न की हैं, जिनमें चांदी को गलाने, उसका वजन करने और सिली तैयार करने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया दिखाई दे रही है।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के लॉकर में सुरक्षित है खजाना

ट्रस्ट ने साफ किया है कि तैयार की गई ये कीमती सिल्वर बार्स वर्तमान में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या मुख्य शाखा के सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम/लॉकर में जमा हैं। भविष्य में जब भी ट्रस्ट बोर्ड उचित समझेगा, मंदिर परिसर के विकास या अन्य धार्मिक कार्यों में इस चांदी का सही इस्तेमाल किया जाएगा।

ट्रस्ट ने दानदाताओं से मांगी एक जरूरी लिस्ट; जारी होगी रसीद

आधिकारिक रसीद न मिलने के सिंधी समाज के शिकायत पर ट्रस्ट ने कहा है कि चूंकि यह दान सामूहिक रूप से समाज की तरफ से आया था, इसलिए व्यक्तिगत रसीदें जारी नहीं हो सकी थीं। ट्रस्ट ने अब विश्व सिंधी सेवा संगम से उन सभी 200 दानदाताओं की एक सूची मांगी है, जिन्होंने इस 200 किलो चांदी के लिए अंशदान दिया था। ट्रस्ट ने दानदाताओं के निम्नलिखित विवरण उपलब्ध कराने को कहा है:

  1. पूरा नाम और स्थायी पता

  2. एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी

  3. पैन कार्ड (PAN) की जानकारी

जैसे ही यह सूची ट्रस्ट को प्राप्त होगी, प्रत्येक दानदाता के नाम से अलग-अलग आधिकारिक डोनेशन रसीद जारी कर दी जाएगी। इस जवाब के बाद सिंधी समाज द्वारा पारदर्शिता को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर फिलहाल विराम लग गया है।

चढ़ावा चोरी मामले में नया खुलासा: गिनती से पहले ही होती थी 'सेटिंग'

दूसरी तरफ, राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच कर रही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ कई नए सुराग लगे हैं। सूत्रों के हवाले से आई ताजा जानकारी के मुताबिक, आरोपी सिर्फ नोटों की गिनती (Counting) के समय ही हेराफेरी नहीं करते थे, बल्कि खेल उससे ठीक पहले की प्रक्रिया में शुरू होता था।

मंदिर परिसर में चढ़ावे में आने वाले भारी-भरकम कैश की गिनती ऑटोमैटिक मशीनों के जरिए की जाती है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों का मुख्य काम मशीन में नोट डालने से पहले उन्हें व्यवस्थित करना, गड्डियां बनाना और सीधे करने का था। जांच में पता चला है कि आरोपी नोटों को व्यवस्थित करने के बहाने सीसीटीवी कैमरों की नजर से बचाकर बड़ी राशि पहले ही अलग कर लेते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस सिंडिकेट में बैंक या ट्रस्ट के कुछ अन्य सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे या नहीं।

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