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भारतीय रेलवे का क्विक रिस्पॉन्स सिस्टम: सफर में असुविधा होते ही तुरंत पहुंचेगी ऑन-बोर्ड टीम

ट्रेन का सफर करते समय कई बार यात्रियों को कोच में गंदगी, बदबूदार टॉयलेट, एयर कंडीशनर (AC) का काम न करना, चार्जिंग पॉइंट खराब होना या कैटरिंग वेंडर द्वारा बासी व घटिया खाना परोसने जैसी अप्रिय स्थितियों का सामना करना पड़ता है। पहले ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए टीटीई (TTE) को ढूंढना पड़ता था या अगले बड़े स्टेशन का इंतजार करना पड़ता था। अब भारतीय रेलवे ने अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया है। 'रेल मदद' (RailMadad) इंटीग्रेटेड पोर्टल और चौबीसों घंटे सक्रिय रहने वाली हेल्पलाइनों की बदौलत यात्री अब अपनी सीट पर बैठे-बैठे मात्र एक डिजिटल मैसेज या क्लिक के जरिए ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग (OBHS), इलेक्ट्रिकल विंग और पेंट्री सुपरवाइजर को सीधे अपने कोच में बुलवा सकते हैं।

रेल मदद (RailMadad) ऐप और पोर्टल: शिकायत दर्ज करने का सबसे असरदार तरीका

रेलवे ने विभिन्न समस्याओं के लिए अलग-अलग नंबरों की झंझट को समाप्त कर सिंगल-विंडो सिस्टम 'रेल मदद' तैयार किया है। इस सुविधा का लाभ मोबाइल ऐप और आधिकारिक वेबसाइट दोनों के जरिए उठाया जा सकता है।

  • पीएनआर आधारित रजिस्ट्रेशन: ऐप या वेबसाइट पर जाकर यात्री को अपना 10 अंकों का पीएनआर (PNR) नंबर दर्ज करना होता है। ऐसा करते ही सिस्टम अपने आप ट्रेन नंबर, कोच और बर्थ की जानकारी फैच कर लेता है।

  • समस्या का चयन: ड्रॉपडाउन मेन्यू में जाकर विशिष्ट शिकायत (जैसे 'बायो-टॉयलेट चोक', 'कोच क्लीनिंग', 'एसी कूलिंग इश्यू' या 'खराब खाना') को चुनें।

  • फोटो या वीडियो अपलोड: अपनी शिकायत को पुख्ता करने के लिए यात्री मौके की लाइव तस्वीर या छोटा वीडियो सीधे पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं।

  • रियल-टाइम ट्रैकिंग: शिकायत दर्ज होते ही मोबाइल पर एक यूनिक कंप्लेंट रेफरेंस नंबर (CRN) आता है, जिसके जरिए लाइव स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है।

हेल्पलाइन 139: बिना इंटरनेट के बस एक कॉल या एसएमएस से समाधान

यदि यात्रा के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर हो, तो रेलवे का ऑल-इन-वन हेल्पलाइन नंबर 139 सबसे तेज और भरोसेमंद विकल्प है। यह नंबर 24×7 सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में कार्य करता है।

  • कॉल के जरिए: 139 डायल करके आईवीआर (IVR) पर संबंधित विकल्प चुनें और सीधे कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव से बात कर अपनी पीएनआर व समस्या दर्ज कराएं।

  • एसएमएस के जरिए: यात्री अपने मोबाइल से साधारण टेक्स्ट मैसेज भेजकर भी कंप्लेंट कर सकते हैं। इसके लिए CLEAN <पीएनआर नंबर> लिखकर 139 पर भेजना होता है। यह मैसेज सीधे ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) के सर्वर पर जाता है और अगले निर्धारित स्टेशन से पहले स्वीपिंग स्टाफ आपकी सीट पर पहुंच जाता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर टैग करते ही एक्टिव होता है डीआरएम कंट्रोल रूम

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले यात्रियों के लिए 'X' शिकायत का सबसे तेज और सार्वजनिक माध्यम बन चुका है। अपनी सीट, कोच नंबर, पीएनआर और समस्या की स्पष्ट तस्वीर के साथ रेलवे के आधिकारिक हैंडल्स—@RailMinIndia, @RailwaySeva और संबंधित डिवीजन के डीआरएम (DRM) को टैग करके पोस्ट करें। रेलवे का सोशल मीडिया सेल 24 घंटे रियल-टाइम मॉनिटरिंग करता है। ट्वीट पोस्ट होने के कुछ ही मिनटों में संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का कंट्रोल रूम ऑन-बोर्ड टीटीई, आरपीएफ और तकनीशियनों को लाइव अलर्ट भेज देता है, जिससे अगले स्टॉपेज पर तुरंत अटेंडेंट कोच में पहुंच जाता है।

खराब खाने और ओवरचार्जिंग पर IRCTC का त्वरित एक्शन

यदि पेंट्री कार या ई-कैटरिंग डिलीवरी में ठंडा, बासी या अस्वच्छ खाना दिया गया है, अथवा वेंडर प्रिंटेड मेन्यू से अधिक पैसे (ओवरचार्जिंग) वसूल रहा है, तो यात्री सीधे आईआरसीटीसी (IRCTC) के टोल-फ्री नंबर 1800-111-139 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा बिल न देने वाले वेंडरों की शिकायत 'रेल मदद' के कैटरिंग सेक्शन में दर्ज कराने पर वेंडर पर भारी जुर्माना लगाया जाता है और यात्री को तुरंत ताजा भोजन या रिफंड की सुविधा दी जाती है।

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