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रियल एस्टेट में बड़ा शिफ्ट: आईटी कॉरिडोर्स को पछाड़कर आगे निकले बैंकिंग व फाइनेंशियल हब्स

भारत के रियल एस्टेट बाजार में रेंटल इनकम (Rental Income) को लेकर निवेशकों की रणनीति में एक बुनियादी बदलाव देखा जा रहा है। पिछले दो दशकों से बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों के आईटी कॉरिडोर्स रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर सबसे ज्यादा रेंटल यील्ड देने वाले हॉटस्पॉट माने जाते थे। हालांकि, टेक कंपनियों में हायरिंग की धीमी रफ्तार, कॉस्ट कटिंग और हाइब्रिड/वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर के चलते आईटी बेल्ट्स में किराये की दरों में ठहराव देखा जा रहा है। इसके विपरीत, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) सेक्टर का जबर्दस्त विस्तार हो रहा है। इसके चलते मुंबई, गिफ्ट सिटी (गुजरात), गुरुग्राम और नोएडा के फाइनेंशियल डिस्ट्रिक्ट्स में रेंटल डिमांड और किराये की दरें नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

आईटी हब्स में रेंटल डिमांड पर ब्रेक क्यों लगा?

तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की जीवनशैली और कंपनियों की नीतियों ने आईटी बेल्ट्स के रेंटल डायनेमिक्स को बदल दिया है। अधिकांश टेक फर्म्स अभी भी फ्लेक्सिबल और हाइब्रिड वर्किंग मॉडल पर काम कर रही हैं, जिससे कर्मचारी ऑफिस के पास महंगे अपार्टमेंट किराए पर लेने के बजाय पेरिफेरल एरियाज या अपने होमटाउन से काम करने को तरजीह दे रहे हैं। इसके अलावा, आईटी सेक्टर में हालिया समय में फ्रेश हायरिंग की गति धीमी रहने और बड़ी वेतन वृद्धियों में कमी आने के कारण बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड/ओआरआर और हैदराबाद के हाईटेक सिटी जैसे इलाकों में किराये की सालाना वृद्धि दर 4 से 6 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई है।

बैंकिंग और BFSI हब्स बने रेंटल इनकम के नए पावरहाउस

आईटी सेक्टर के विपरीत, बैंकिंग और कॉर्पोरेट फाइनेंस सेक्टर में 100% ऑफिस उपस्थिति अनिवार्य है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स, प्राइवेट इक्विटी प्रोफेशनल्स, फंड मैनेजर्स, रिस्क एनालिस्ट्स और वेल्थ एडवाइजर्स की आय और डिस्पोजेबल इनकम काफी अधिक होती है। ये प्रोफेशनल्स ऑफिस से 15-20 मिनट की दूरी पर प्रीमियम और गेटेड कम्युनिटीज में रहने के लिए ऊंचे किराये का भुगतान करने को तैयार रहते हैं। इसी वजह से वित्तीय केंद्रों के 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित 2 और 3 बीएचके फ्लैट्स की ऑक्यूपेंसी रेट 95 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है और किराये में सालाना 10 से 15 प्रतिशत का उछाल देखा जा रहा है।

देश के शीर्ष फाइनेंशियल माइक्रो-मार्केट्स जहां मिल रहा है सबसे ज्यादा रिटर्न

वित्तीय क्षेत्र के विस्तार से जिन प्रमुख माइक्रो-मार्केट्स में किराये से होने वाली कमाई सबसे तेजी से बढ़ रही है, उनकी सूची इस प्रकार है:

  • मुंबई (BKC, लोअर परेल और अंधेरी ईस्ट): देश की वित्तीय राजधानी में बीकेसी और लोअर परेल के पास स्थित आवासीय संपत्तियों की रेंटल यील्ड 4.5 से 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो ऐतिहासिक रूप से 2.5-3 प्रतिशत हुआ करती थी।

  • गिफ्ट सिटी (गांधीनगर-अहमदाबाद, गुजरात): भारत के पहले इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में वैश्विक बैंकों, फिनटेक फर्म्स और ब्रोकर्स के ऑफिस खुलने से यहां 1 और 2 बीएचके अपार्टमेंट्स पर 6 से 8 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व रेंटल यील्ड मिल रही है।

  • गुरुग्राम (गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन और साइबर सिटी पेरिफेरी): बहुराष्ट्रीय निवेश बैंकों और परामर्श फर्म्स के बैक-ऑफिस हब होने के चलते यहां प्रीमियम रेंटल हाउसिंग की जबर्दस्त कमी है, जिससे मकान मालिकों को मोटा किराया मिल रहा है।

  • नवी मुंबई और ठाणे (बैक-ऑफिस बैंकिंग कॉरिडोर): फिनटेक और शेयर्ड सर्विसेज सेंटर्स के तेजी से बसने से यहां मध्यम बजट में हाई रेंटल यील्ड दर्ज की जा रही है।

रेंटल यील्ड और प्रॉपर्टी एप्रिसिएशन का सटीक संतुलन

वित्तीय गलियारों में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां डिफॉल्ट का जोखिम नगण्य होता है। कॉर्पोरेट लीजिंग और प्रोफेशनल्स के साथ 11 महीने के बजाय 2 से 3 साल के लॉन्ग-टर्म लीज एग्रीमेंट आसानी से हो जाते हैं। इसके साथ ही, इन इलाकों में मेट्रो कनेक्टिविटी, इंटरनेशनल स्कूल्स, हाई-स्ट्रीट रिटेल और ग्रेड-ए कमर्शियल डेवलपमेंट के कारण कैपिटल वैल्यू (प्रॉपर्टी के मूल दाम) में भी लगातार सालाना 8 से 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो रही है, जिससे निवेशकों को डुअल बेनिफिट (किराया + कैपिटल गेन) मिल रहा है।

नए रियल एस्टेट निवेशकों के लिए स्मार्ट इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी

यदि आप केवल किराये से नियमित पैसिव इनकम कमाने के उद्देश्य से प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • यूनिट साइज का चयन: फाइनेंशियल हब्स में 1 BHK, कॉम्पैक्ट 2 BHK और पूरी तरह फर्निश्ड स्टूडियो अपार्टमेंट्स की रेंटल डिमांड सबसे ज्यादा रहती है क्योंकि युवा प्रोफेशनल्स तुरंत शिफ्ट होने वाले घरों को प्राथमिकता देते हैं।

  • एमिनिटीज और कनेक्टिविटी: जिम, स्विमिंग पूल, को-वर्किंग लाउंज और एक्सप्रेसवे/मेट्रो से डायरेक्ट कनेक्टिविटी वाली सोसायटियों में 20-25 प्रतिशत अधिक किराया मिलता है।

  • स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग: कमर्शियल हब्स के पास अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के बजाय रेडी-टू-मूव या नियर-पजेशन प्रॉपर्टी चुनें ताकि ईएमआई (EMI) शुरू होते ही पहले महीने से रेंटल कैशफ्लो शुरू हो सके।

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