China US Iran Ceasefire : 26 फोन कॉल और टल गया महायुद्ध अमेरिका-ईरान के बीच शांति के पीछे छिपा है ड्रैगन का दिमाग

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में मंडरा रहे विश्व युद्ध के काले बादलों को छांटने में पर्दे के पीछे एक ऐसी कूटनीति चली, जिसकी भनक दुनिया को बहुत बाद में लगी। अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक दो हफ्ते के युद्धविराम के पीछे चीन की सक्रिय भूमिका की खबरें अब सार्वजनिक हो रही हैं। बताया जा रहा है कि बीजिंग के शीर्ष राजनयिकों ने महज कुछ घंटों के भीतर रिकॉर्ड 26 फोन कॉल किए, जिसने वॉशिंगटन और तेहरान को युद्ध के मैदान से हटाकर बातचीत की मेज पर ला खड़ा किया।ड्रैगन की ‘शटल डिप्लोमेसी’ ने बचाई दुनियाजब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर था और किसी भी वक्त मिसाइलें दगने की आशंका थी, तब चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। चीनी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बीजिंग ने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व और अमेरिकी विदेश विभाग के बीच एक ‘पुल’ का काम किया। इन 26 कॉल्स में न केवल तेल आपूर्ति की सुरक्षा पर बात हुई, बल्कि चीन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि युद्ध शुरू होता है, तो इसके आर्थिक परिणाम पूरे एशिया के लिए विनाशकारी होंगे।ईरान पर चीन का ‘आर्थिक दबाव’ आया कामईरान के लिए चीन सबसे बड़ा तेल खरीदार और व्यापारिक साझेदार है। जानकारों का मानना है कि चीन ने तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया कि वे संघर्ष को और न भड़काएं। दूसरी तरफ, अमेरिका के साथ भी चीन ने पर्दे के पीछे से बातचीत की ताकि इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम किया जा सके। इस मध्यस्थता ने चीन को वैश्विक राजनीति में एक जिम्मेदार ‘महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है, जो संघर्षों को सुलझाने की क्षमता रखता है।सिर्फ दो हफ्ते की शांति या बड़ी योजना?भले ही अभी युद्धविराम केवल 14 दिनों के लिए हुआ है, लेकिन चीन इसे स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग चाहता है कि इस दौरान ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते होने वाला वैश्विक व्यापार फिर से पटरी पर आए। चीन की इस कूटनीतिक जीत ने यह साबित कर दिया है कि अब वैश्विक संकटों के समाधान के लिए केवल वॉशिंगटन की ओर देखना काफी नहीं है, बल्कि बीजिंग भी अब एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है।