RBI ने जारी किए ड्राफ्ट KYC Rules: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मनी म्यूल और साइबर फ्रॉड पर कड़ा एक्शन; जानें ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा

डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन के बढ़ते दायरे के बीच साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल (फर्जी खातों के जरिए धोखाधड़ी की रकम ट्रांसफर करना) के मामलों पर नकेल कसने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के अनुपालन में केंद्रीय बैंक ने ड्राफ्ट 'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (केवाईसी) अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026' जारी कर दिए हैं। इन प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध बैंक खातों पर अस्थायी डेबिट रोक (Temporary Debit Hold) लगाने की प्रक्रिया को एक समान (SOP आधारित) बनाना और साइबर अपराधियों के सिंडिकेट को तोड़ना है। इसके साथ ही यह कदम आम और ईमानदार बैंक ग्राहकों को भी बिना नोटिस खाते अचानक फ्रीज होने की परेशानी से सुरक्षित रखेगा।
सुप्रीम कोर्ट का क्या था आदेश?
देश भर में साइबर धोखाधड़ी की रकम को तुरंत अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर एटीएम या यूपीआई से निकालने के बढ़ते नेटवर्क (Money Mule Accounts) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था।
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सर्वोच्च अदालत ने 4 अगस्त 2026 के अपने आदेश में आरबीआई को निर्देश दिया था कि वह सभी बैंकों के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) तैयार करे और लागू कराए।
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इस एसओपी का उद्देश्य यह तय करना था कि जब भी किसी खाते में साइबर ठगी या संदिग्ध लेन-देन का संदेह हो, तो बैंक उस खाते या उसमें मौजूद विशिष्ट विवादित राशि पर तुरंत और कानूनी रूप से सही प्रक्रिया के तहत अस्थायी डेबिट रोक (Debit Hold) लगा सकें।
आम खाताधारकों को इससे क्या होगा सीधा फायदा?
यह ड्राफ्ट नियम लागू होने के बाद आम नागरिकों और बैंकिंग उपभोक्ताओं को कई अहम लाभ मिलेंगे:
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ठगी गई रकम की त्वरित रिकवरी: यदि किसी नागरिक के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है और वह तुरंत हेल्पलाइन (1930 या पोर्टल) पर शिकायत दर्ज करता है, तो नए मानकीकृत नियमों के तहत बैंक फ्रॉड की रकम को रिसीवर के खाते में तुरंत ब्लॉक (डेबिट होल्ड) कर सकेंगे, जिससे पैसे निकाले जाने से पहले बचाए जा सकेंगे।
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पूरा खाता बेवजह फ्रीज होने से राहत: पहले कई मामलों में देखा गया कि किसी तीसरे व्यक्ति से गलती से या बिजनेस ट्रांजैक्शन के जरिए आई छोटी रकम के कारण पुलिस या बैंक पूरा अकाउंट ही सीज कर देते थे। नए नियमों में स्पष्टता होगी कि संदिग्ध रकम की सीमा तक ही आंशिक होल्ड लगे, न कि निर्दोष ग्राहक के पूरे खाते का संचालन ठप हो।
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समयबद्ध सीमा (Time-bound Debit Hold): ड्राफ्ट प्रस्तावों के तहत खातों पर बिना किसी कानूनी जांच या एफआईआर के अनिश्चित काल तक डेबिट होल्ड नहीं रखा जा सकेगा। इसके लिए अधिकतम समयसीमा (जैसे 60 दिन) तय करने का प्रस्ताव है, जिससे जांच एजेंसियों को तेजी से काम करना होगा।
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पारदर्शी सूचना और अपील का अधिकार: यदि किसी खाते पर कोई प्रतिबंध लगाया जाता है, तो बैंक को ग्राहक को एसएमएस, ईमेल या पत्र के जरिए वैध कारण और समाधान का रास्ता अनिवार्य रूप से बताना होगा।
किन बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे ये नियम?
आरबीआई द्वारा जारी यह ड्राफ्ट सर्कुलर बैंकिंग तंत्र के लगभग सभी संस्थानों पर लागू होगा:
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सभी वाणिज्यिक बैंक (सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंक)
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स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) और पेमेंट्स बैंक
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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और लोकल एरिया बैंक
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शहरी सहकारी बैंक (Urban Cooperative Banks – UCBs)
आम जनता और स्टेकहोल्डर्स कैसे दे सकते हैं अपने सुझाव?
रिजर्व बैंक ने इन ड्राफ्ट नियमों को अंतिम रूप देने से पहले जनता, वित्तीय विशेषज्ञों और बैंकिंग संस्थानों से प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझाव भेजने की अंतिम तारीख 02 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
सुझाव दर्ज कराने के दो आधिकारिक तरीके उपलब्ध हैं:
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वेबसाइट के माध्यम से: आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर जाएं और वहां उपलब्ध 'Connect 2 Regulate' सेक्शन पर क्लिक करके सीधे अपना फीडबैक सबमिट करें।
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ईमेल द्वारा: आप सीधे ईमेल के जरिए भी अपनी राय भेज सकते हैं। इसके लिए ईमेल के सब्जेक्ट लाइन में अनिवार्य रूप से लिखें:
Feedback on Draft Reserve Bank of India (Know Your Customer) Amendment Directions, 2026 और इसे आरबीआई द्वारा निर्दिष्ट ईमेल आईडी पर भेजें।
जनता और सभी पक्षों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद आरबीआई अंतिम मास्टर डायरेक्शन जारी करेगा।