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अयोध्या में आज फिर दिवाली जैसा जश्न, जानिए उस पल की कहानी जब 161 फीट ऊपर लहराया भगवा

News India Live, Digital Desk : आज अयोध्या का माहौल देखने लायक है! अगर आपको याद हो तो जनवरी 2024 में जब रामलला टेंट से निकलकर अपने भव्य महल में आए थे, तब पूरी दुनिया ने उस पल को जिया था। आज, यानी 25 नवंबर 2025 को, वह चक्र पूरा हो गया है। राम मंदिर के निर्माण का काम अब अपने अंजाम तक पहुंच गया है और इसकी निशानी है मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर लहराता हुआ वह विशाल ध्वज।लाइव अपडेट: पीएम मोदी का अयोध्या दौराप्रधानमंत्री मोदी आज फिर रामनगरी में हैं। लेकिन यह दौरा आम नहीं है। आज ‘विवाह पंचमी’ का पवित्र त्यौहार है—वो दिन जब प्रभु श्री राम और माता सीता का विवाह हुआ था। इसी पावन दिन को मंदिर केशिखर पर ध्वजारोहण के लिए चुना गया, जो हमारी संस्कृति में किसी भी मंदिर के पूरी तरह तैयार होने का प्रतीक माना जाता है।सुबह से ही अयोध्या में हलचल है। पीएम मोदी ने सबसे पहले हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए, और उसके बाद वो ऐतिहासिक पल आया जिसका सबको इंतजार था। करीब 161 फीट की ऊंचाई पर जाकर मुख्य गुंबद (शिखर) पर धर्म ध्वज को स्थापित किया गया। ऐसा माना जाता है कि ध्वज लगने के बाद ही मंदिर में दिव्यता पूर्ण रूप से जागृत होती है।क्यों खास है यह ध्वजारोहण?इसे आप सिर्फ एक झंडा फहराने की रस्म मत समझिएगा। यह रामभक्तों के 500 सालों के इंतजार की ‘फाइनल मोहर’ है। यह ध्वज अष्टधातु और विशेष कपड़ों से तैयार किया गया है ताकि आंधी-तूफान में भी यह अडिग रहे—बिल्कुल रामभक्तों की आस्था की तरह। इसके साथ ही मंदिर परिसर में बनेसप्त ऋषियों के मंदिरों में भी प्राण-प्रतिष्ठा की रस्में पूरी की जा रही हैं।अयोध्या का नजारा: सुरक्षा और भक्ति का संगमजहाँ एक तरफअयोध्या में सुरक्षा इंतज़ाम बेहद कड़े हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है, वहीं दूसरी तरफ भक्तों के चेहरे पर सुकून और खुशी साफ़ दिख रही है। ‘जय श्री राम’ के नारे एक बार फिर सरयू के तटों पर गूंज रहे हैं। सोशल मीडिया पर हर कोई अपने तरीके से इस पल को शेयर कर रहा है।कुल मिलाकर, आज का दिन यह संदेश दे रहा है कि राम मंदिर अब सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का पूरा हुआ संकल्प है। अगर आप वहां मौजूद नहीं भी हैं, तो भी टीवी या फोन स्क्रीन के ज़रिए इस ऐतिहासिक पल को महसूस जरूर करें, क्योंकि ऐसे दिन इतिहास में बार-बार नहीं आते।

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