न बैटिंग फ्लॉप, न बॉलिंग रही बेकार; फिर क्यों इंग्लैंड में शर्मसार हुई टीम इंडिया? सामने आई सबसे बड़ी कमजोरी

क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इंग्लैंड के मैदानों पर जब भी भारत और इंग्लैंड के बीच टक्कर होती है, तो रोमांच सातवें आसमान पर होता है। लेकिन हालिया मुकाबले में टीम इंडिया को जिस तरह की हार का सामना करना पड़ा है, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमूमन किसी भी मैच में हार का ठीकरा बल्लेबाजों के खराब शॉट सिलेक्शन या गेंदबाजों की दिशाहीन गेंदबाजी पर फोड़ा जाता है। लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह अलग है। कप्तान से लेकर कोच तक, सभी इस बात से हैरान हैं कि टीम इंडिया अपनी तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि एक बुनियादी कमजोरी के कारण बैकफुट पर आ गई।
मैदान पर सुस्ती पड़ी भारी, छूटे कैचों ने पलटा पूरा मैच
इस मुकाबले में टीम इंडिया की हार की सबसे मुख्य और बड़ी वजह रही उसकी बेहद खराब फील्डिंग। जब आप इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उनकी सरजमीं पर खेल रहे हों, तो आप 'कैच छोड़ो, मैच छोड़ो' की कहावत को हल्के में नहीं ले सकते। भारतीय फील्डर्स ने मैच के कई अहम मोड़ों पर न सिर्फ बेहद आसान कैच टपकाए, बल्कि मिस-फील्डिंग के जरिए विपक्षी टीम को कई अतिरिक्त रन भी तोहफे में दे दिए। इन जीवनदानों का फायदा उठाकर इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने मैच का पासा पूरी तरह से पलट दिया और भारतीय गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिए।
ग्राउंड डाइविंग और खराब थ्रो ने बढ़ाई गेंदबाजों की टेंशन
आधुनिक क्रिकेट में फिटनेस और चुस्ती-फुर्ती को सबसे ऊपर रखा जाता है, लेकिन इस मैच में भारतीय खिलाड़ियों की बॉडी लैंग्वेज काफी सुस्त नजर आई। बाउंड्री लाइन पर ढीली फील्डिंग और विकेटकीपर तक सीधे थ्रो न फेंक पाने की वजह से बल्लेबाजों ने आसानी से डबल और ट्रिपल रन चुराए। दबाव के क्षणों में जब टीम को एक-एक रन बचाने की जरूरत थी, तब फील्डिंग में हुई इन बचकानी गलतियों ने गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया। यही वजह रही कि अच्छी गेंदबाजी के बावजूद टीम इंडिया विरोधी टीम के रनों की रफ्तार पर लगाम नहीं लगा सकी।
क्या वर्कलोड मैनेजमेंट बन रहा है टीम की सुस्ती का कारण?
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार क्रिकेट खेलने की वजह से खिलाड़ियों में थकान साफ तौर पर देखी जा सकती है। कैचिंग पोजीशन में सही समय पर रिएक्ट न कर पाना और थ्रोइंग में सटीकता की कमी यह दर्शाती है कि खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक सजगता का स्तर गिरा है। कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती आगामी मैचों से पहले टीम के फील्डिंग स्टैंडर्ड को वापस उसी पुराने वर्ल्ड क्लास लेवल पर ले जाने की होगी, क्योंकि बिना चुस्त फील्डिंग के इंग्लैंड की धरती पर सीरीज जीतना नामुमकिन है।