उत्तर प्रदेश

पंचायत चुनाव से पहले बरेली के गांवों में छिड़ा लेटर वार ,35 ग्राम प्रधानों को मिली क्लीन चिट

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही ग्रामीण अंचलों में सियासी पारा चढ़ने लगा है। बरेली जनपद के गांवों में इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा ‘शिकायती अस्त्र’ चर्चा में है। चुनावी रंजिश के चलते मौजूदा ग्राम प्रधानों को घेरने के लिए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की बाढ़ आ गई है। हालांकि, जिला प्रशासन की बारीकी से की गई जांच में इन शिकायतों की हवा निकलती नजर आ रही है। जिला पंचायत राज विभाग ने अब तक की जांच के बाद 35 ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों से क्लीन चिट दे दी है।चुनावी रंजिश और ‘शिकायती अस्त्र’ का खेलजैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है, गांवों में विपक्षी खेमे सक्रिय हो गए हैं। बरेली के विभिन्न विकास खंडों से जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) कार्यालय में शिकायतों का तांता लगा हुआ है। विरोधियों द्वारा मुख्य रूप से नाली-खड़ंजा निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, सामुदायिक शौचालयों के आवंटन में धांधली और मनरेगा के बजट में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इनमें से अधिकांश शिकायतें विकास की चिंता के बजाय आगामी चुनाव में प्रतिद्वंद्वी की छवि खराब करने के इरादे से की जा रही हैं।जांच में बेदाग निकले 35 प्रधान, रंजिश में फंसाने की साजिश नाकामपंचायती राज विभाग ने इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन कर जांच शुरू की थी। जांच अधिकारियों ने गांवों में जाकर न केवल भौतिक सत्यापन किया, बल्कि तकनीकी टीम के साथ मिलकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता भी परखी। इसके साथ ही बैंक स्टेटमेंट, वाउचर और एमबी (Measurement Book) जैसे वित्तीय दस्तावेजों का मिलान किया गया। डीपीआरओ कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, 35 मौजूदा प्रधानों और एक पूर्व प्रधान के खिलाफ दर्ज शिकायतें पूरी तरह निराधार और केवल निजी द्वेष से प्रेरित पाई गईं, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक तौर पर क्लीन चिट दे दी गई है।9 मामलों पर अभी भी टिकी हैं निगाहें: जांच जारीप्रशासन जहां झूठी शिकायतों को खारिज कर रहा है, वहीं कुछ गंभीर मामलों में जांच का शिकंजा अभी भी कसा हुआ है। विभाग वर्तमान में आठ मौजूदा और एक पूर्व प्रधान के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों की गहराई से पड़ताल कर रहा है। इनमें सुकटिया, मधुनगला, सुंदरी, मटकापुर, भौआ बाजार, स्वाले मुजाहिदपुर, हरेली अलीपुर, मस्तीपुर और डंडिया नवाजिस अली के प्रधान शामिल हैं। इन गांवों में विकास कार्यों के रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।प्रशासन की सख्त चेतावनी: फर्जी शिकायत करने वालों पर गिरेगी गाजजिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी, लेकिन चुनावी लाभ के लिए सरकारी तंत्र का समय बर्बाद करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यदि यह साबित होता है कि किसी ने केवल परेशान करने या राजनीतिक लाभ के लिए झूठी शिकायत की थी, तो ऐसे शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, क्लीन चिट मिलने से 35 प्रधानों ने राहत की सांस ली है, लेकिन गांवों में चुनावी बिसात और गुटबाजी अब और तेज होने की उम्मीद है।

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