कब्रिस्तान में रात भर क्यों गुजारते थे कादर खान? जब एक शख्स ने पकड़ा हाथ और बदल गई किस्मत, बेहद फिल्मी है किस्सा

News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड के इतिहास में कादर खान एक ऐसा नाम है, जिन्होंने विलेन बनकर डराया भी और कॉमेडियन बनकर लोटपोट भी किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए कादर खान रातों को कब्रिस्तान में वक्त बिताया करते थे? आज हम आपको उस महान कलाकार के संघर्ष की वो अनसुनी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी। यह कहानी है एक आम लड़के के ‘शहंशाह’ बनने की, जिसकी शुरुआत एक अंधेरे कब्रिस्तान से हुई थी।कब्रिस्तान की खामोशी में करते थे अभिनय का रियाज कादर खान का बचपन बेहद गरीबी और तंगहाली में गुजरा। मुंबई की चॉल में रहने वाले कादर खान को बचपन से ही कुछ अलग करने का जुनून था। वह अक्सर रात के अंधेरे में पास के एक कब्रिस्तान में चले जाते थे। वहां की खामोशी के बीच वह जोर-जोर से डायलॉग बोलते थे और अलग-अलग किरदारों को जीने की कोशिश करते थे। उन्हें लगता था कि अगर वह कब्रिस्तान की शांति में अपनी आवाज से प्रभाव पैदा कर सकते हैं, तो वह दुनिया के सामने भी खुद को साबित कर देंगे।एक रात जब अजनबी ने थाम लिया हाथ एक रात जब कादर खान हमेशा की तरह कब्रिस्तान में अपनी एक्टिंग की प्रैक्टिस कर रहे थे, तभी वहां एक शख्स आया और उन्होंने कादर खान का हाथ थाम लिया। वह शख्स कोई और नहीं बल्कि उस जमाने के मशहूर कलाकार और निर्देशक थे। उन्होंने कादर खान से पूछा कि तुम यहां इतनी रात को क्या कर रहे हो? जब कादर खान ने अपनी कला के प्रति समर्पण दिखाया, तो उस शख्स ने तुरंत पहचान लिया कि इस लड़के में कुछ खास बात है। यही वो पल था जिसने कादर खान के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए।लिखी ऐसी फिल्में कि बन गए संवादों के जादूगर कादर खान ने न सिर्फ अभिनय किया, बल्कि उन्होंने ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘नसीब’, ‘लावारिस’ और ‘कुली’ जैसी कालजयी फिल्मों के संवाद भी लिखे। उनके लिखे डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। उन्होंने अमिताभ बच्चन के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई। उनके संवादों में जो वजन और सच्चाई होती थी, वह उनकी उसी कड़ी मेहनत का नतीजा थी जो उन्होंने कब्रिस्तान की रातों में सीखी थी।अंतिम समय में भी याद आया वो संघर्ष कादर खान अक्सर अपने साक्षात्कारों में जिक्र करते थे कि इंसान को कभी अपनी जड़ें नहीं भूलनी चाहिए। वह कहते थे कि जो उन्होंने उन खामोश कब्रों के बीच सीखा, वह दुनिया की कोई भी एक्टिंग स्कूल नहीं सिखा सकती थी। भले ही आज कादर खान हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनके जबरदस्त डायलॉग्स हमेशा उनकी याद दिलाते रहेंगे। उनका जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि अगर आपमें जुनून है, तो मंजिल खुद-ब-खुद मिल जाती है।