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दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दामों में बड़ा उछाल, आम जनता के सफर पर महंगाई की मार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में दैनिक आवाजाही करने वाले लाखों यात्रियों, कैब चालकों और निजी वाहन स्वामियों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। प्रमुख गैस वितरण कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने दिल्ली और आसपास के सेटेलाइट शहरों में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की खुदरा कीमतों में ₹3.89 प्रति किलोग्राम तक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। संशोधित दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी हैं। घरेलू गैस आपूर्ति और इनपुट गैस लागत में वैश्विक स्तर पर हुए बदलावों के बाद यह कदम उठाया गया है। सीएनजी के दामों में इस तीव्र वृद्धि से न केवल निजी कार मालिकों का ईंधन बजट बिगड़ेगा बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ऑटो रिक्शा, ऐप-बेस्ड कैब और स्कूल वैन का किराया भी बढ़ने की प्रबल संभावना बन गई है।

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में क्या हैं सीएनजी के नए रेट्स?

इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड द्वारा जारी नई मूल्य सूची के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में सीएनजी के दाम नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली के भीतर अब सीएनजी की खुदरा कीमत बढ़कर लगभग ₹79.50 से ₹80 प्रति किलोग्राम के स्तर को छू गई है, जो पहले ₹75.09 से ₹76 के आसपास थी। वहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में वैट और स्थानीय शुल्कों के अंतर के चलते दरें ₹84 से ₹85 प्रति किलोग्राम के पार निकल गई हैं। हरियाणा के गुरुग्राम, रेवाड़ी और करनाल में भी सीएनजी की दरों में आनुपातिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस मूल्य संशोधन से दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों कम्यूटर्स की मासिक यात्रा लागत में सीधा इजाफा होना तय है।

ऑटो, टैक्सी यूनियनों में आक्रोश: किराया बढ़ाने की मांग तेज

सीएनजी की कीमतों में अचानक ₹3.89 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी होने के बाद दिल्ली-एनसीआर की विभिन्न ऑटो-टैक्सी यूनियनों और ड्राइवर यूनियनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कैब और ऑटो चालकों का कहना है कि पहले से ही उच्च कमीशन दरों, वाहन बीमा और रखरखाव खर्चों के कारण उनकी दैनिक कमाई सीमित हो चुकी थी। अब सीएनजी महंगी होने से उनकी दैनिक बचत में प्रतिदिन ₹100 से ₹150 की सीधी कटौती होगी। यूनियनों ने दिल्ली सरकार और राज्य परिवहन प्राधिकरणों से ऑटो के मीटर किराए और बेस फेयर में तत्काल 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि करने की औपचारिक मांग शुरू कर दी है। यदि प्रशासन जल्द ही फेयर रिवीजन (किराया संशोधन) नहीं करता है, तो चालकों द्वारा हड़ताल और विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी जा रही है।

ओला-उबर और ऐप आधारित कैब का किराया बढ़ने के पूरे आसार

दैनिक कार्यालय जाने वाले यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो जैसी राइड-हेलिंग एग्रीगेटर कंपनियां भी जल्द ही अपने प्रति किलोमीटर किराए और पीक-ऑवर सर्ज प्राइसिंग (Surge Pricing) में संशोधन कर सकती हैं। अधिकांश कमर्शियल कैब्स सीएनजी पर ही संचालित होती हैं। ईंधन की लागत बढ़ने से कैब एग्रीगेटर्स अपने प्लेटफॉर्म शुल्क और प्रति किलोमीटर दर में ₹1.50 से ₹2.50 तक की वृद्धि कर सकते हैं। इसके अलावा, डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स कंपनियों द्वारा संचालित हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LCVs) की परिचालन लागत बढ़ने से दिल्ली-एनसीआर में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स डिलीवरी सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है।

स्कूल बसों, वैन और दैनिक बजट पर पड़ेगा चौतरफा असर

सीएनजी के दाम बढ़ने का असर केवल दैनिक यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्कूली बच्चों के अभिभावकों पर भी इसका सीधा वित्तीय भार पड़ेगा। दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के प्राइवेट स्कूल बस एसोसिएशन और वैन संचालकों ने पहले ही मासिक बस फीस में वृद्धि के संकेत दे दिए हैं। स्कूल वैन और फीडर बसों के मासिक शुल्क में ₹200 से ₹400 प्रति छात्र की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अतिरिक्त, जो लोग दैनिक रूप से अपने निजी सीएनजी वाहनों से 50 से 70 किलोमीटर का सफर तय करते हैं, उनका मासिक फ्यूल बिल ₹1,000 से ₹1,500 तक बढ़ जाएगा, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक वित्तीय संतुलन प्रभावित होगा।

सीएनजी के दाम बढ़ने की मुख्य वजहें: गैस इनपुट कॉस्ट और सब्सिडी में बदलाव

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सीएनजी की कीमतों में इस ताजा वृद्धि के पीछे घरेलू गैस आवंटन में कमी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के आयात मूल्य में वृद्धि मुख्य कारण है। केंद्र सरकार की नई मूल्य निर्धारण नीति के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को मिलने वाली सस्ती प्रशासनिक मूल्य तंत्र (APM) गैस का कोटा सीमित हो गया है। इसके चलते आईजीएल जैसी वितरण कंपनियों को अपनी मांग पूरी करने के लिए खुले और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से महंगी आयातित गैस खरीदनी पड़ रही है। इस अतिरिक्त इनपुट लागत का सीधा भार कंपनियों द्वारा अंतिम उपभोक्ताओं पर ट्रांसफर किया जा रहा है।

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