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Stray dogs relocation Supreme Court order :’बेजुबान जानवरों को शेल्टर के नाम पर सजा मत दीजिये’

Stray dogs relocation Supreme Court order:अक्सर हम सुनते हैं कि लोग अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरते हैं,लेकिन शनिवार को देश भर में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। भारत के कोने-कोने से करीब1लाख से ज्यादा लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को स्पीड पोस्ट के जरिए चिट्ठियां भेजीं। मकसद सिर्फ एक था-गली-मोहल्लों में रहने वाले बेजुबान आवारा कुत्तों को जबरदस्ती शेल्टर (आश्रय गृह) में भेजने से बचाना।आखिर क्यों उठी यह मुहीम?यह सारा मामला7नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आए एक आदेश या टिप्पणी से जुड़ा है,जिसमें आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने की बात कही गई थी। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि स्वस्थ,नसबंदी किए हुए और टीकाकृत कुत्तों को उनके इलाको से हटाकर पिंजरों वाले शेल्टर में भेजना क्रूरता है। यह न तो वैज्ञानिक तरीका है और न ही मानवीय।इन्हीं चिंताओं को लेकर शनिवार सुबह देश के तमाम डाकघरों (GPO)पर पशु प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ी। अनंतनाग (कश्मीर) से लेकर कन्याकुमारी तक,हर जगह से जजों के नाम चिट्ठियां पोस्ट की गईं। लोगों ने आग्रह किया है कि इस आदेश को वापस लिया जाए और बेजुबानों का पक्ष भी सुना जाए।”सड़कों पर ही सुरक्षित हैं हमारे डॉगी”मुंबई के वर्सोवा में हुए एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में करीब300लोगों ने हिस्सा लिया। उनका साफ़ कहना है कि अगर कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करना है,तो नसबंदी (Sterilization)और टीकाकरण ही एकमात्र सही रास्ता है। उन्हें जबरन शेल्टर में भरने से वहां भीड़ बढ़ेगी,बीमारियां फैलेंगी और कुत्ते तड़प-तड़प कर मर जाएंगे।पीपुल फॉर एनिमल्स (PFA)की अंबिका शुक्ला ने इस मुहीम में साथ देने वाले1लाख नागरिकों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि हम अपने लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर इन बेजुबानों के हक़ की लड़ाई लड़ते रहेंगे।साइरस ब्रोचा औरIITके छात्र भी आए आगेमुंबई से मशहूर एक्टर और एंकर साइरस ब्रोचा ने भी स्पीड पोस्ट भेजकर अपनी चिंता जाहिर की। वहीं,आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay)के छात्रों और टीचरों ने भी साफ़ कर दिया कि वे अपने कैंपस के कुत्तों के साथ ही रहना चाहते हैं,उन्हें किसी अज्ञात जगह नहीं भेजना चाहते।कहां हैं शेल्टर?मार्मिक एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन की मानसी दीक्षित ने एक बहुत ही वाजिब सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि बीएमसी (BMC)के पास तो कुत्तों के लिए ढंग के शेल्टर ही नहीं हैं,तो अधिकारियों ने अगर गली के कुत्तों को उठा भी लिया,तो रखेंगे कहां?पशु प्रेमियों का मानना है कि’आवारा’कहकर उन्हें समाज से अलग करना गलत है। वे हमारे मोहल्लों का हिस्सा हैं। अगर उन्हें उनके हाल पर शेल्टरों में छोड़ दिया गया,तो यह उनकी मौत का फरमान होगा। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं कि क्या वह इन1लाख चिट्ठियों में छिपे दर्द को महसूस करेगा।

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