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US-Iran No Deal: जेडी वेंस ने खोला राज, आखिर क्यों बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से लौटा अमेरिकी दल?

News India Live, Digital Desk: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दुनिया की सबसे बड़ी कूटनीतिक हलचल तब फीकी पड़ गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता ‘बिना किसी नतीजे’ के समाप्त हो गई। इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग के बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने खुद सामने आकर उन कारणों का खुलासा किया है, जिनकी वजह से जो बाइडन प्रशासन के बाद ट्रंप सरकार की यह पहली बड़ी कोशिश नाकाम रही। वेंस के बयानों ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ के मूड में बिल्कुल नहीं है।ईरान की ‘अक्षमता’ बनी समझौते में रोड़ा: वेंस का तीखा प्रहारजेडी वेंस ने इस्लामाबाद से रवानगी से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वार्ता विफल होने का सबसे बड़ा कारण ईरान का अपनी शर्तों पर अड़े रहना और क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी देने में ‘अक्षमता’ दिखाना था। वेंस के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल एक ठोस रोडमैप लेकर गया था, लेकिन ईरान की ओर से कोई ऐसा ठोस प्रस्ताव नहीं आया जो अमेरिका की चिंताओं को दूर कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी ऐसी डील पर हस्ताक्षर नहीं करेगा जो केवल कागजों तक सीमित हो और जमीनी हकीकत न बदले।परमाणु कार्यक्रम और जब्त फंड पर नहीं बनी बातसूत्रों के मुताबिक, बातचीत के दौरान सबसे ज्यादा पेंच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और विदेशों में फ्रीज किए गए उसके अरबों डॉलर के फंड पर फंसा। ईरान चाहता था कि अमेरिका पहले सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए और उसके फंड जारी करे, जबकि जेडी वेंस और उनकी टीम का रुख था कि पहले ईरान अपने परमाणु ठिकानों का पूरी तरह से निरीक्षण करने की अनुमति दे। वेंस ने संकेत दिया कि ईरान की बातचीत की शैली ‘पुरानी और टालने वाली’ थी, जिसे आधुनिक अमेरिकी प्रशासन स्वीकार करने को तैयार नहीं है।पाकिस्तान की भूमिका: मेज़बान तो बना पर मध्यस्थता में रहा नाकाम?इस वार्ता के लिए पाकिस्तान ने काफी तैयारी की थी और इसे अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहा था। लेकिन जेडी वेंस के खाली हाथ लौटने से इस्लामाबाद की उम्मीदों को भी झटका लगा है। वेंस ने पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना तो की, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि केवल जगह उपलब्ध करा देना काफी नहीं है, जब तक कि दोनों पक्षों के बीच नियत साफ न हो। इस विफलता के बाद अब पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आगे क्या कदम उठाता है।’अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर अडिग ट्रंप प्रशासनजेडी वेंस का यह दौरा अमेरिकी विदेश नीति के एक नए युग का संकेत है। उन्होंने दो टूक कहा कि अमेरिका अब ऐसी किसी भी संधि का हिस्सा नहीं बनेगा जिससे अमेरिकी हितों को नुकसान पहुँचता हो। वेंस के इस बयान के बाद अब ईरान पर दबाव और बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब अमेरिका और इजराइल की संयुक्त रणनीति ईरान के खिलाफ और अधिक सख्त हो सकती है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है।

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