रामपुर की राजनीति में फिर भूचाल: अब्दुल्ला आजम को फर्जी पासपोर्ट मामले में 7 साल की सजा, ‘7’ के फेर में फंसा परिवार

Abdullah Azam fake passport conviction : रामपुर में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके परिवार की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। मुसीबतों का यह सिलसिला थमने के बजाय और गहराता जा रहा है। शुक्रवार को एक बड़ी खबर सामने आई-आजम खान के बेटे और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले में रामपुर कीMP/MLAकोर्ट ने दोषी करार देते हुए7साल की सजासुनाई है। साथ ही उन पर50,000रुपये का जुर्मानाभी लगाया गया है।चूंकि अब्दुल्ला पहले से ही जेल में हैं,इसलिए कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए उनकी पेशी कराई और वहीं उन्हें यह सजा सुनाई गई।क्या था यह’पासपोर्ट वाला मामला’?कहानी की शुरुआत साल2019में हुई थी,जब रामपुर से बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना ने पुलिस में एक रिपोर्ट लिखवाई थी। उनका आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने हेराफेरी करके दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवा रखे हैं।असल पेंच’जन्मतिथि’ (Date of Birth)का था।आरोप के मुताबिक,एक पासपोर्ट में अब्दुल्ला की जन्मतिथि1जनवरी1993लिखी थी (जो उनके स्कूल और कॉलेज के रिकॉर्ड से मेल खाती है)।वहीं,दूसरे पासपोर्ट में जन्मतिथि1990दिखाई गई थी।बीजेपी विधायक का तर्क था कि अब्दुल्ला ने अलग-अलग फायदों के लिए,फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर दूसरा पासपोर्ट बनवाया और उसका इस्तेमाल भी किया। कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद सबूतों को सही माना और फैसला सुनाया कि’हां,दस्तावेजों में कूटराचित हेराफेरी की गई थी।’अब्दुल्ला और’7साल’का अजीब संयोगहैरानी की बात यह है कि पिछले कुछ समय में अब्दुल्ला आजम को जितने भी बड़े मामलों में सजा मिली है,वो’7साल’ही रही है। यह उनके लिए एक तरह का’बैड लक’बन गया है।18दिन पहले:अभी ज्यादा दिन नहीं बीते,जब’दो पैन कार्ड’रखने के मामले में अब्दुल्ला और उनके पिता आजम खान,दोनों को7-7साल की सजा सुनाई गई थी।2023का केस:इससे पहले’फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट’ (जन्म प्रमाण पत्र) मामले में भी बाप-बेटे को7-7साल की सजा हो चुकी है।अब पासपोर्ट केस:और अब यह फर्जी पासपोर्ट का मामला,इसमें भी7साल की सजा मिली है।अब आगे क्या?आजम खान और अब्दुल्ला आजम पहले से ही रामपुर जेल में बंद हैं। इस नए फैसले ने उनकी कानूनी लड़ाई को और भी मुश्किल बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन लगातार हो रही सजाओं ने इस सियासी परिवार की’राजनीतिक वापसी’के दरवाजों पर फिलवक्त बड़े ताले जड़ दिए हैं। अब्दुल्ला की विधायकी पहले ही जा चुकी है और अब इन सजाओं के बाद चुनाव लड़ने की राह और मुश्किल हो गई है।