इस्लामाबाद वार्ता से पहले भारी बवाल ख्वाजा आसिफ के विवादित बोल ने बिगाड़ा खेल, भड़के नेतन्याहू ने लगाई लताड़

News India Live, Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक तीखे बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तूफान ला दिया है। इजरायल के खिलाफ की गई उनकी अपमानजनक टिप्पणी के बाद न केवल पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि इस शांति प्रक्रिया की नींव भी डगमगा गई है।रक्षा मंत्री का विवादित पोस्ट और इजरायल का पलटवारविवाद की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इजरायल को ‘मानवता के लिए अभिशाप और कैंसर’ करार दे दिया। उन्होंने लेबनान में हो रही मौतों के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। इस बयान के आते ही इजरायल ने कड़ा रुख अपनाया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इसे ‘अपमानजनक’ और ‘असहनीय’ बताया। भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ख्वाजा आसिफ को अपना पोस्ट डिलीट करना पड़ा, लेकिन तब तक कूटनीतिक संबंधों को नुकसान पहुँच चुका था।इजरायल ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठाए सवालइजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने पाकिस्तान के इस रुख को ‘भयानक यहूदी विरोधी मानसिकता’ का प्रतीक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ पाकिस्तान खुद को शांति दूत के रूप में पेश कर रहा है और दूसरी तरफ नफरत फैला रहा है। इजरायल के विरोध ने पाकिस्तान की उस छवि को गहरा झटका दिया है, जिसके तहत वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर उभरना चाहता था।धुआं-धुआं होती शांति वार्ता: ट्रंप ने भी दी चेतावनीएक तरफ पाकिस्तान और इजरायल के बीच जुबानी जंग जारी है, तो दूसरी तरफ जमीन पर अमेरिका-ईरान युद्धविराम में भी दरारें दिखने लगी हैं। वार्ता से ठीक 24 घंटे पहले वाशिंगटन ने तेहरान पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए लिखा, “ईरान समझौते का पालन करने में बहुत खराब प्रदर्शन कर रहा है। यह वह डील नहीं है जो हमने की थी!”हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ठप पड़ा व्यापारविवाद का एक बड़ा कारण व्यापारिक वादाखिलाफी भी है। हॉर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही को सुगम बनाने का वादा किया गया था, लेकिन युद्धविराम के पहले 24 घंटों में वहां सन्नाटा पसरा रहा। जहां रोजाना औसतन 140 जहाज गुजरते थे, वहां से केवल एक तेल टैंकर और पांच मालवाहक जहाज ही निकल पाए। इस आर्थिक और रणनीतिक गतिरोध ने इस्लामाबाद में होने वाली बैठक की सफलता पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब सबकी नजरें शुक्रवार की बैठक पर हैं कि क्या पाकिस्तान इस बिगड़ते माहौल को संभाल पाएगा?