विदेश

H-1B में है बड़ा फर्जीवाड़ा ,अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारतीय मूल के ससुराल पक्ष की तारीफ कर छेड़ा वीजा विवाद

News India Live, Digital Desk : अमेरिका के नवनियुक्त उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक बार फिर अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) के एजेंडे को धार देते हुए प्रवासियों और वीजा प्रणाली पर बड़ा बयान दिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया में एक कार्यक्रम के दौरान वेंस ने जहाँ अपने भारतीय मूल के ससुराल वालों की जमकर तारीफ की, वहीं H-1B वीजा सिस्टम में हो रहे कथित फर्जीवाड़े को लेकर सख्त चेतावनी भी दी। वेंस का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप-वेंस प्रशासन प्रवासन (Immigration) और वर्क वीजा को लेकर बेहद कड़े रुख अपनाए हुए है।’ससुराल वालों ने अमेरिका को समृद्ध बनाया, पर नियम सबके लिए एक’अपनी पत्नी उषा वेंस के परिवार का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके ससुर आंध्र प्रदेश से अमेरिका आए, यहीं शिक्षा ली और नागरिक बने। उन्होंने अपने ससुराल वालों को ‘महान योगदानकर्ता’ बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखा। वेंस ने भावुक होते हुए कहा, “मेरे ससुर ने कभी मुझसे यह नहीं कहा कि मुझे कुछ इसलिए करना चाहिए क्योंकि वह उनके मूल देश (भारत) के हित में है। उन्होंने हमेशा अमेरिका के बारे में सोचा और यही एक आदर्श नागरिक की जिम्मेदारी है।”H-1B वीजा पर कड़ा प्रहार: “सिस्टम में भरा है फर्जीवाड़ा”ससुराल पक्ष की तारीफ के साथ ही जेडी वेंस ने एक तीखा सवाल भी खड़ा किया। उन्होंने कहा कि H-1B वीजा प्रणाली में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा हो रहा है। वेंस के मुताबिक, “आप एक तरफ यह मान सकते हैं कि प्रवासियों ने अमेरिका को समृद्ध बनाया है, लेकिन साथ ही यह भी सच है कि मौजूदा वीजा सिस्टम में बहुत सी कमियां हैं जिनका गलत फायदा उठाया जा रहा है।” उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में H-1B वीजा धारकों और इसके जरिए मिलने वाले ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में और अधिक सख्ती बरती जाएगी।नए नागरिकों के लिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मंत्रवेंस ने साफ संदेश दिया कि चाहे किसी की विरासत 9 पीढ़ियों पुरानी हो या कोई अभी-अभी नागरिक बना हो, उसकी पहली वफादारी केवल और केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को अपने मूल देश के बजाय अमेरिका के सर्वोत्तम हितों के बारे में सोचना होगा। उपराष्ट्रपति का यह बयान उन हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता का विषय बन सकता है जो सालों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं या H-1B वीजा के सहारे अमेरिका में बसे हैं।

Back to top button