बांग्लादेश में दीपू दास के परिवार के साथ खड़ा हुआ भारत ,हम आपके साथ हैं, सिर्फ़ कहा नहीं, करके दिखाया

News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश से सिर्फ दिल दहलाने वाली और गुस्से से भर देने वाली खबरें ही आ रही थीं। लेकिन इस अंधेरे के बीच एक ऐसी खबर आई है जो थोड़ी राहत और सुकून देती है। यह खबर भारत की संवेदनशीलता और इंसानियत की मिसाल है। चटगांव (Chittagong) में हुई हिंसा के दौरान मारे गए दीपू चंद्र दास के परिवार को भारत ने लावारिस नहीं छोड़ा।दुःख के पहाड़ के नीचे दबा परिवारहम सबने देखा कि कैसे इस्कॉन विवाद और प्रदर्शनों के दौरान एक बेगुनाह, दीपू दास, को अपनी जान गंवानी पड़ी। उनके जाने से उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका था। सोचिये उस बूढ़े मां-बाप और परिवार पर क्या बीत रही होगी जिसका जवान बेटा इस तरह चला गया। ऐसी स्थिति में अक्सर लोग हमदर्दी जताते हैं और चले जाते हैं, लेकिन भारत सरकार ने वहां एक बड़ा कदम उठाया है।चटगांव में भारतीय अधिकारियों की दस्तकखबरों के मुताबिक़, चटगांव में भारत के सहायक उच्चायोग (Assistant High Commission of India) के अधिकारियों ने दीपू दास के घर जाकर उनके परिवार से मुलाकात की। यह सिर्फ़ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी। अधिकारियों ने वहां बैठकर परिवार का दुःख बांटा और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि भारत इस मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ा है।इतना ही नहीं, भारत की तरफ से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक मदद (Financial Assistance) भी सौंपी गई। हालांकि पैसे से किसी की जान की कीमत नहीं आंकी जा सकती, लेकिन मुसीबत के वक्त यह मदद एक बड़े सहारे का काम करती है। यह परिवार को यह एहसास दिलाता है कि दुनिया में अभी भी उनके लिए खड़े होने वाले लोग मौजूद हैं।दुनिया भर से मिल रहा है साथसिर्फ़ भारत सरकार ही नहीं, बल्कि अमेरिका और दुनिया के अन्य कोनों में बैठे लोग भी इस घटना से आहत हैं और मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इस मामले ने यह दिखा दिया है कि भले ही सरहदें हमें बांटती हों, लेकिन जब किसी बेगुनाह पर जुल्म होता है, तो इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती।एक कड़ा संदेश भीभारत का यह कदम कूटनीतिक रूप से भी बहुत मायने रखता है। यह बांग्लादेश सरकार और वहां के उपद्रवियों को एक कड़ा संदेश है कि भारत वहां रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चुप नहीं बैठने वाला। अगर किसी भारतीय या अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के साथ गलत होता है, तो भारत उनकी सुध लेगा।दीपू तो वापस नहीं आ सकते, लेकिन उनके परिवार को मिला यह साथ शायद उनके जख्मों पर थोड़ा मरहम जरूर लगा पाएगा।